August 30, 2025 5:50 PM

जुलाई में रिटेल महंगाई घटकर 1.55% — 8 साल में सबसे निचला स्तर, खाने-पीने की कीमतों में आई बड़ी गिरावट

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जुलाई में रिटेल महंगाई घटकर 1.55% — 8 साल में सबसे निचला स्तर, खाने-पीने की कीमतों में आई बड़ी गिरावट

जुलाई में रिटेल महंगाई 1.55% पर, 8 साल में सबसे कम; खाने-पीने की कीमतों में गिरावट से राहत

नई दिल्ली। देश में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) जुलाई 2025 में घटकर मात्र 1.55% पर आ गई है, जो पिछले 8 साल 1 महीने में सबसे निचला स्तर है। इससे पहले जून 2017 में रिटेल महंगाई 1.54% दर्ज की गई थी। ताजा आंकड़े सोमवार, 12 अगस्त को जारी किए गए, जिनके अनुसार जून 2025 में यह दर 2.10%, मई में 2.82% और अप्रैल में 3.16% रही थी।

खाने-पीने की कीमतों में नरमी का असर

महंगाई में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में लगातार आ रही कमी है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में लगभग 50% योगदान खाद्य सामग्रियों का होता है। जुलाई में खाद्य वस्तुओं की महीने-दर-महीने महंगाई माइनस 1.06% से घटकर माइनस 1.76% हो गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में जून की तुलना में महंगाई 1.72% से घटकर 1.18% पर आ गई, जबकि शहरी इलाकों में यह 2.56% से घटकर 2.05% रही।

RBI के लक्ष्य से भी नीचे

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का लक्ष्य महंगाई को 4% ± 2% यानी 2% से 6% के दायरे में रखना है। इस बार की रिटेल महंगाई दर 1.55% होने से यह न केवल लक्ष्य सीमा के निचले किनारे से भी नीचे है, बल्कि यह संकेत देती है कि फिलहाल बाजार में मांग का दबाव कम है और आपूर्ति की स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित है।

महंगाई कैसे घटती-बढ़ती है?

महंगाई का स्तर मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति पर निर्भर करता है।

  • जब मांग अधिक और आपूर्ति कम होती है, तो कीमतें बढ़ने लगती हैं और महंगाई चढ़ जाती है।
  • जब मांग कम और आपूर्ति अधिक होती है, तो कीमतें गिरने लगती हैं और महंगाई घट जाती है।

अगर लोगों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा होता है तो वे ज्यादा खरीदारी करते हैं, जिससे मांग बढ़ती है। आपूर्ति उस अनुपात में नहीं बढ़ने पर कीमतें ऊपर चली जाती हैं। इसके उलट, मांग घटने और आपूर्ति बढ़ने पर बाजार में कीमतें कम हो जाती हैं।

CPI से मापी जाती है रिटेल महंगाई

खुदरा महंगाई को मापने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index – CPI) का इस्तेमाल किया जाता है। CPI उन वस्तुओं और सेवाओं के औसत मूल्य में बदलाव को मापता है जिन्हें उपभोक्ता रोज़ाना खरीदते हैं — जैसे खाद्य पदार्थ, कपड़े, आवास, ईंधन और अन्य उपभोक्ता सामान। इसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के आंकड़े शामिल होते हैं।

विशेषज्ञों की राय

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि खाद्य कीमतों में यह गिरावट अच्छी खबर है, लेकिन अत्यधिक कम महंगाई दर भी अर्थव्यवस्था में मांग की कमजोरी का संकेत हो सकती है। ऐसे में आने वाले महीनों में RBI को मौद्रिक नीति में नरमी लाने का अवसर मिल सकता है, ताकि बाजार में मांग को प्रोत्साहित किया जा सके।

स्वदेश ज्योति के द्वारा | और भी दिलचस्प खबरें आपके लिए… सिर्फ़ स्वदेश ज्योति पर!

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Meta Description: जुलाई 2025 में रिटेल महंगाई 1.55% पर पहुंची, जो 8 साल 1 महीने का निचला स्तर है। खाने-पीने की कीमतों में कमी से राहत, RBI लक्ष्य से भी नीचे रही दर।
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नई दिल्ली। देश में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) जुलाई 2025 में घटकर मात्र 1.55% पर आ गई है, जो पिछले 8 साल 1 महीने में सबसे निचला स्तर है। इससे पहले जून 2017 में रिटेल महंगाई 1.54% दर्ज की गई थी। ताजा आंकड़े सोमवार, 12 अगस्त को जारी किए गए, जिनके अनुसार जून 2025 में यह दर 2.10%, मई में 2.82% और अप्रैल में 3.16% रही थी।

खाने-पीने की कीमतों में नरमी का असर

महंगाई में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में लगातार आ रही कमी है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में लगभग 50% योगदान खाद्य सामग्रियों का होता है। जुलाई में खाद्य वस्तुओं की महीने-दर-महीने महंगाई माइनस 1.06% से घटकर माइनस 1.76% हो गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में जून की तुलना में महंगाई 1.72% से घटकर 1.18% पर आ गई, जबकि शहरी इलाकों में यह 2.56% से घटकर 2.05% रही।

RBI के लक्ष्य से भी नीचे

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का लक्ष्य महंगाई को 4% ± 2% यानी 2% से 6% के दायरे में रखना है। इस बार की रिटेल महंगाई दर 1.55% होने से यह न केवल लक्ष्य सीमा के निचले किनारे से भी नीचे है, बल्कि यह संकेत देती है कि फिलहाल बाजार में मांग का दबाव कम है और आपूर्ति की स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित है।

महंगाई कैसे घटती-बढ़ती है?

महंगाई का स्तर मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति पर निर्भर करता है।

  • जब मांग अधिक और आपूर्ति कम होती है, तो कीमतें बढ़ने लगती हैं और महंगाई चढ़ जाती है।
  • जब मांग कम और आपूर्ति अधिक होती है, तो कीमतें गिरने लगती हैं और महंगाई घट जाती है।

अगर लोगों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा होता है तो वे ज्यादा खरीदारी करते हैं, जिससे मांग बढ़ती है। आपूर्ति उस अनुपात में नहीं बढ़ने पर कीमतें ऊपर चली जाती हैं। इसके उलट, मांग घटने और आपूर्ति बढ़ने पर बाजार में कीमतें कम हो जाती हैं।

CPI से मापी जाती है रिटेल महंगाई

खुदरा महंगाई को मापने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index – CPI) का इस्तेमाल किया जाता है। CPI उन वस्तुओं और सेवाओं के औसत मूल्य में बदलाव को मापता है जिन्हें उपभोक्ता रोज़ाना खरीदते हैं — जैसे खाद्य पदार्थ, कपड़े, आवास, ईंधन और अन्य उपभोक्ता सामान। इसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के आंकड़े शामिल होते हैं।

विशेषज्ञों की राय

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि खाद्य कीमतों में यह गिरावट अच्छी खबर है, लेकिन अत्यधिक कम महंगाई दर भी अर्थव्यवस्था में मांग की कमजोरी का संकेत हो सकती है। ऐसे में आने वाले महीनों में RBI को मौद्रिक नीति में नरमी लाने का अवसर मिल सकता है, ताकि बाजार में मांग को प्रोत्साहित किया जा सके।

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