हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। प्रत्येक व्रत के पीछे कोई न कोई गहरी आध्यात्मिक भावना, आस्था और पौराणिक कथा जुड़ी होती है, जो मानव जीवन को सही दिशा देने का कार्य करती है। व्रत केवल धार्मिक परंपरा नहीं होते, बल्कि ये मन, विचार और कर्म को शुद्ध करने का माध्यम भी माने जाते हैं। इन्हीं पावन व्रतों में संकट चौथ व्रत का विशेष महत्व बताया गया है, जिसे भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने के उद्देश्य से श्रद्धा और विश्वास के साथ रखा जाता है।
संकट चौथ का व्रत विशेष रूप से जीवन में आने वाले संकटों, बाधाओं, भय और परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है। यह व्रत उन लोगों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है जो अपने जीवन में निरंतर संघर्ष, मानसिक तनाव या किसी न किसी कठिन परिस्थिति से गुजर रहे होते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया संकट चौथ का व्रत व्यक्ति को धैर्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
धार्मिक विश्वासों के अनुसार भगवान गणेश को संकट हरने वाला देवता कहा जाता है। वे बुद्धि, विवेक और शुभता के प्रतीक माने जाते हैं। जब भी जीवन में कोई नई शुरुआत होती है या कोई कठिन कार्य सामने आता है, तो सबसे पहले भगवान गणपति का स्मरण किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि उनकी कृपा से सभी कार्य निर्विघ्न पूर्ण होते हैं। इसी कारण संकट चौथ का व्रत भगवान गणेश को समर्पित एक विशेष पर्व माना जाता है।
संकट चौथ कब और क्यों मनाई जाती है
संकट चौथ का व्रत प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन उपवास रखकर गणेश जी की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चतुर्थी तिथि भगवान गणेश की प्रिय तिथि मानी जाती है। इस दिन किया गया व्रत न केवल व्यक्तिगत संकटों को दूर करता है, बल्कि परिवार में सुख-शांति और समृद्धि भी लाता है।
संकट चौथ व्रत की पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय की बात है जब पृथ्वी पर एक निर्धन ब्राह्मण रहता था। वह अत्यंत धर्मपरायण और भगवान गणेश का अनन्य भक्त था। लेकिन उसके जीवन में निरंतर दुख और संकट बने रहते थे। आर्थिक परेशानी और पारिवारिक कष्टों से वह बहुत दुखी रहता था।
एक दिन उसने सच्चे मन से भगवान गणेश से प्रार्थना की और संकट चौथ का व्रत रखने का संकल्प लिया। उसने पूरे विधि-विधान से व्रत रखा, गणेश जी की पूजा की और उनकी कथा सुनी। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने उसे दर्शन दिए और उसके सभी संकटों को दूर कर दिया।
उस दिन के बाद ब्राह्मण का जीवन सुख और समृद्धि से भर गया। तभी से यह मान्यता प्रचलित हुई कि संकट चौथ का व्रत सच्चे मन से करने पर भगवान गणेश जीवन के सभी कष्ट हर लेते हैं।
संकट चौथ व्रत की पूजा विधि
संकट चौथ के दिन प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद घर के पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ किया जाता है और वहां भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है। पूजा से पहले मन को शांत कर व्रत का संकल्प लिया जाता है।
भगवान गणेश की पूजा पूरे विधि-विधान से की जाती है। उन्हें प्रिय वस्तुएं अर्पित की जाती हैं और श्रद्धा भाव से उनका स्मरण किया जाता है। पूजा के दौरान भगवान गणेश का ध्यान किया जाता है और उनके मंत्रों का जप किया जाता है। इसके बाद संकट चौथ व्रत की कथा का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि कथा सुनने और सुनाने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
पूजा में आवश्यक पूजन सामग्री
- भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र
- दूर्वा घास
- लाल या पीले फूल
- मोदक या लड्डू
- फल
- अक्षत
- चंदन
- धूप
- दीपक
- कपूर
- जल से भरा कलश
- व्रत कथा की पुस्तक
पूजा के अंत में भगवान गणेश से जीवन के सभी संकट दूर करने और सुख-शांति प्रदान करने की प्रार्थना की जाती है। इसके बाद चंद्र दर्शन कर व्रत का पारण किया जाता है।
शुभ मुहूर्त का महत्व
संकट चौथ व्रत में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि शुभ समय में की गई पूजा अधिक फलदायी होती है। इस दिन चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है।
चंद्र दर्शन करते समय भगवान गणेश से संकट दूर करने की प्रार्थना की जाती है। माना जाता है कि चंद्र दर्शन के बिना व्रत का फल अधूरा रहता है।
व्रत से मिलने वाले लाभ
संकट चौथ का व्रत करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। कार्यों में सफलता मिलने लगती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह व्रत परिवार में सुख-समृद्धि और सौहार्द बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है।
भक्तों का विश्वास है कि नियमित रूप से संकट चौथ का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में स्थायित्व और सकारात्मकता आती है।
संकट चौथ व्रत में क्या करें और क्या न करें
व्रत के दिन सात्विक आचरण रखना आवश्यक माना जाता है। क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। पूजा के समय पूर्ण श्रद्धा और एकाग्रता बनाए रखना चाहिए।
इस दिन किसी का अपमान नहीं करना चाहिए और जरूरतमंदों की सहायता करना शुभ माना जाता है।
संकट चौथ व्रत का आध्यात्मिक संदेश
संकट चौथ व्रत हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति और धैर्य से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है। भगवान गणेश की उपासना मन को शांत करती है और जीवन में संतुलन बनाए रखती है।
यह व्रत केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को मजबूत करने का माध्यम भी है।
निष्कर्ष
संकट चौथ व्रत भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है। इस दिन की पौराणिक कथा, सही पूजा विधि और शुभ मुहूर्त का पालन करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। सच्चे मन से किया गया यह व्रत व्यक्ति को आध्यात्मिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।
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