राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सर्वोच्च न्यायालय के लिए दो नए जज नियुक्त किए, सुप्रीम कोर्ट की संख्या हुई पूरी
नई दिल्ली। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश की न्यायपालिका के सर्वोच्च स्तर पर महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय के लिए दो नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की है। राष्ट्रपति ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आलोक आराधे और पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वी. एम. पंचोली को उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया।
कॉलेजियम की अनुशंसा पर मुहर
25 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने इन दोनों नामों को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने की सिफारिश की थी। कॉलेजियम की इस अनुशंसा पर राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद अब दोनों जज देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीश की भूमिका निभाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या हुई पूरी
सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की अधिकतम स्वीकृत संख्या 34 है, जिसमें एक प्रधान न्यायाधीश और 33 अन्य न्यायाधीश शामिल होते हैं। अभी तक यहां 32 जज कार्यरत थे। आलोक आराधे और वी. एम. पंचोली की नियुक्ति के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय में जजों की कुल संख्या अब 34 हो गई है। इससे न्यायिक कार्यों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है, क्योंकि लंबे समय से अदालतों में लंबित मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है।
दोनों न्यायाधीशों का कार्यकाल और पृष्ठभूमि
- आलोक आराधे: वे वर्तमान में बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थे। आराधे का न्यायिक करियर लंबा और उत्कृष्ट रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय से अपने न्यायिक करियर की शुरुआत की थी और बाद में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय तथा कर्नाटक उच्च न्यायालय में भी सेवा दी।
- वी. एम. पंचोली: वे पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। पंचोली ने गुजरात उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्य शुरू किया और अपनी सटीक व संतुलित न्यायिक दृष्टि के लिए जाने जाते हैं।


कॉलेजियम की अन्य सिफारिशें
इसी बीच, प्रधान न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 25 और 26 अगस्त को हुई बैठकों में कई अन्य बड़े निर्णय भी लिए। इनमें देशभर के 14 उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के स्थानांतरण की सिफारिश शामिल है। कॉलेजियम का कहना है कि न्यायपालिका में संतुलन और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे स्थानांतरण जरूरी होते हैं।
न्यायपालिका पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियुक्तियों से सुप्रीम कोर्ट की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। न्यायपालिका पहले से ही लंबित मामलों के बोझ से जूझ रही है। दो नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लोगों को समय पर न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही, कॉलेजियम द्वारा प्रस्तावित स्थानांतरण से उच्च न्यायालयों में भी कार्य संस्कृति और पारदर्शिता में सुधार की उम्मीद है।
लोकतंत्र के लिए अहम कदम
भारत में न्यायपालिका लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर हर कदम संवैधानिक प्रक्रिया और पारदर्शिता पर आधारित होता है। राष्ट्रपति द्वारा की गई ये नियुक्तियां न केवल न्यायपालिका को सशक्त बनाती हैं, बल्कि नागरिकों के बीच न्याय व्यवस्था पर विश्वास को भी मजबूत करती हैं।
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