August 30, 2025 6:37 AM

संसद में बिहार मतदाता पुनरीक्षण सूची को लेकर हंगामा, लोकसभा-राज्यसभा स्थगित

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संसद में बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण पर हंगामा, लोकसभा-राज्यसभा स्थगित

नईदिल्ली। संसद के मानसून सत्र में सोमवार को विपक्षी दलों ने बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण (Electoral Roll Revision) को लेकर जबरदस्त हंगामा किया। इसके चलते लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित हुई और बार-बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष के तेवर इतने तीखे रहे कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को कड़ी चेतावनी देनी पड़ी।

लोकसभा में विपक्ष का आक्रामक रुख, अध्यक्ष की फटकार

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सांसद वेल तक पहुंच गए और जमकर नारेबाजी करने लगे। विपक्षी दल एसआईआर और चुनाव आयोग द्वारा जारी मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे थे। इस बीच, सदन में हंगामे का स्तर इतना बढ़ गया कि अध्यक्ष ओम बिरला को सख्त लहजे में कहना पड़ा—

“यदि आप सवाल उसी ताकत से पूछते, जिस ताकत से नारे लगाते हैं, तो यह देश और जनता के लिए ज्यादा फायदेमंद होता। लोगों ने आपको सरकारी संपत्ति तोड़ने के लिए नहीं भेजा है। यदि आप ऐसा करेंगे तो मुझे निर्णायक कार्रवाई करनी पड़ेगी और देश की जनता आपको देख रही है।”

अध्यक्ष ने दोहराया कि किसी भी सदस्य को सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा दोबारा हुआ तो संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।

राज्यसभा में भी उठा विरोध का तूफान

राज्यसभा में भी विपक्ष ने इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा किया। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए मतदाता सूची संशोधन को लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला करार दिया। विपक्ष का आरोप है कि बिहार में चुनाव आयोग के निर्देशों का इस्तेमाल मतदाता सूचियों में हेरफेर के लिए किया जा रहा है, जिससे लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होंगी।

संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन

सदन के भीतर ही नहीं, बल्कि संसद भवन परिसर में भी विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया। खरगे समेत कांग्रेस, राजद, जदयू और वाम दलों के सांसदों ने मिलकर सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि मतदाता सूची में छेड़छाड़ कर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है।

लोकतंत्र और जवाबदेही पर बहस

यह पहला मौका नहीं है जब संसद का मानसून सत्र विपक्ष और सत्ता पक्ष के टकराव की भेंट चढ़ा हो। लेकिन सोमवार का घटनाक्रम खास इसलिए रहा क्योंकि लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सांसदों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विपक्ष अपने आक्रामक तेवर जारी रखता है, तो सदन की कार्रवाई बाधित होने से जनता से जुड़े अहम विधेयकों और नीतियों पर चर्चा नहीं हो पाएगी।


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