ऑपरेशन सिंदूर पर भारतीय वायुसेना का खुलासा, रक्षा मंत्री का टैरिफ पर अमेरिका को सख्त संदेश
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किए गए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर तीन महीने बाद बड़ा खुलासा हुआ है। वायुसेना उप प्रमुख एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने कहा कि पाकिस्तान को युद्धविराम की मेज पर लाने के लिए भारतीय वायुसेना को 50 से भी कम हथियारों का इस्तेमाल करना पड़ा। यह तथ्य इस बात का सबूत है कि भारतीय सेनाओं ने बेहद रणनीतिक और सटीक कार्रवाई कर पाकिस्तान को झुकने पर मजबूर किया।
“युद्ध शुरू करना आसान, खत्म करना मुश्किल”
एनडीटीवी डिफेंस समिट में बोलते हुए एयर मार्शल तिवारी ने कहा कि भारतीय वायुसेना के सामने उस समय बड़ी संख्या में टारगेट मौजूद थे। लेकिन गहन रणनीति के बाद यह तय किया गया कि केवल नौ ठिकानों पर हमला किया जाए। उन्होंने कहा – “हमारे लिए मुख्य चुनौती यह थी कि सीमित संसाधनों और हथियारों का इस्तेमाल करके दुश्मन को अधिकतम नुकसान पहुंचाया जाए। अंततः हमने 50 से भी कम हथियारों के जरिए सीजफायर हासिल किया। युद्ध शुरू करना आसान है, लेकिन उसे खत्म करना कहीं ज्यादा कठिन होता है। इसलिए यह सुनिश्चित करना ज़रूरी था कि सेनाएं सक्रिय और सजग रहें।”
#NDTVDefenceSummit2025 | वायु सेना के उप-प्रमुख एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने दिखाया ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय पर हुए हमले का वीडियो. #OperationSindoor pic.twitter.com/wSVw2LpyVt
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सौजन्य : एनडीटीवी
पहलगाम हमले का जवाब बना ऑपरेशन सिंदूर
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में कई सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। इसके जवाब में भारत ने 7 मई को पाकिस्तान स्थित 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत के डीजीएमओ से युद्धविराम की अपील की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारतीय वायुसेना की रणनीतिक सफलता थी, जिसने पाकिस्तान को पीछे हटने पर मजबूर किया।
तीन मुख्य निर्देश और IACCS की अहम भूमिका
एयर मार्शल तिवारी ने कहा कि नई दिल्ली से सेनाओं को तीन स्पष्ट निर्देश मिले थे—
- दुश्मन के खिलाफ हर कार्रवाई कठोर और दंडात्मक होनी चाहिए।
- ऐसा संदेश दिया जाए जिससे भविष्य में कोई हमला करने की हिम्मत न जुटा सके।
- सेनाओं को पूरी परिचालन स्वतंत्रता दी जाए और साथ ही इस संभावना के लिए तैयार रहना होगा कि संघर्ष पारंपरिक युद्ध का रूप भी ले सकता है।
उन्होंने इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) की भूमिका को भी निर्णायक बताया। तिवारी के अनुसार, चार दिन चले संघर्ष में यह सिस्टम आक्रामक और रक्षात्मक दोनों अभियानों की रीढ़ साबित हुआ। इसी के जरिए भारत ने शुरुआती हमलों को झेलने के साथ दुश्मन को करारा जवाब दिया।
पाकिस्तान के 5 लड़ाकू विमान ढेर
इससे पहले वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 9 अगस्त को कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के पांच लड़ाकू विमान गिराए गए थे। इसके अलावा एक सर्विलांस एयरक्राफ्ट को भी 300 किलोमीटर की दूरी से मार गिराया गया। उन्होंने बताया कि यह सतह से हवा में टारगेट हिटिंग का अब तक का रिकॉर्ड है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का स्पष्ट संदेश
डिफेंस समिट में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अमेरिकी टैरिफ विवाद पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा—
“कोई भी देश स्थायी मित्र या स्थायी दुश्मन नहीं होता। केवल स्थायी हित होते हैं। हमारे लिए अपने लोगों, किसानों और छोटे व्यापारियों का हित सर्वोपरि है। चाहे कितना भी दबाव आए, भारत समझौता नहीं करेगा।”
उन्होंने कहा कि आज दुनिया ट्रेड वॉर जैसी परिस्थितियों का सामना कर रही है और विकसित देश तेजी से संरक्षणवाद की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी को दुश्मन नहीं मानता, लेकिन राष्ट्रीय हित और जनता के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।
'आत्मनिर्भरता विकल्प नहीं, अस्तित्व के लिए जरूरी है': NDTV डिफेंस समिट में बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह#NDTVDefenceSummit2025 | #RajnathSingh pic.twitter.com/jSyerrlxL5
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सौजन्य : एनडीटीवी
भारत का बढ़ता रक्षा निर्यात
राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2014 में जहां रक्षा निर्यात 700 करोड़ रुपये से भी कम था, वहीं आज यह बढ़कर 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा—“यह इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का खरीदार नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण निर्यातक भी बन चुका है।”
अमेरिका का टैरिफ विवाद और भारत का रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में भारत पर 50% टैरिफ लगाया है, जो 27 अगस्त से लागू हो गया है। ट्रम्प प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगाने के बहाने पहले 25% टैरिफ लगाया और अब इसे बढ़ाकर 50% कर दिया गया है। भारत, चीन के बाद रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और हर साल 130 अरब डॉलर से अधिक का तेल आयात करता है।
प्रधानमंत्री मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत इस दबाव से घबराने वाला नहीं है। 25 अगस्त को अहमदाबाद में उन्होंने कहा था—“मेरे देश के छोटे उद्यमियों, किसानों और पशुपालकों का हित सर्वोपरि है। चाहे कितना भी दबाव आए, हम उसे झेलने की ताकत रखते हैं और आगे भी इस ताकत को बढ़ाते रहेंगे।”
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेनाओं की सटीक रणनीति, तकनीकी दक्षता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रतीक बन चुका है। 50 से कम हथियारों के प्रयोग से पाकिस्तान को झुकाने वाली यह कार्रवाई बताती है कि भारत सीमित संसाधनों के साथ भी बड़े परिणाम हासिल करने की क्षमता रखता है। वहीं, अमेरिकी टैरिफ विवाद के बीच भारत का साफ संदेश यह है कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं और भारत किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुकने वाला नहीं है।
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