निक्की हेली ने चेताया- भारत से रिश्ते बिगाड़ना अमेरिका की बड़ी रणनीतिक भूल होगी
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत और रिपब्लिकन पार्टी की वरिष्ठ नेता निक्की हेली ने ट्रम्प प्रशासन को भारत के साथ रिश्तों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ने पिछले 25 वर्षों में भारत के साथ बनाए गए भरोसे को तोड़ दिया, तो यह एक बड़ी रणनीतिक गलती साबित होगी।
निक्की हेली ने यह बात एक प्रमुख अमेरिकी पत्रिका न्यूजवीक में प्रकाशित अपने लेख में लिखी। यह लेख उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाए जाने और उसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए लिखा। उनका कहना है कि भारत को चीन जैसा प्रतिद्वंद्वी मानकर दंडित करना उचित नहीं है, बल्कि उसे अमेरिका का सबसे भरोसेमंद लोकतांत्रिक साझेदार समझना चाहिए।

43 साल पुरानी मुलाकात का हवाला
निक्की हेली ने अपने लेख की शुरुआत वर्ष 1982 में उस ऐतिहासिक मुलाकात से की, जब अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सम्मान में व्हाइट हाउस में डिनर का आयोजन किया था। उस समय रीगन ने कहा था कि भारत और अमेरिका दोनों स्वतंत्र राष्ट्र हैं, उनके रास्ते कभी-कभी अलग हो सकते हैं, लेकिन उनकी मंजिल समान है।
हेली ने लिखा कि चार दशक बाद आज यही रिश्ते एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक विवाद बढ़ रहे हैं, जिससे परस्पर विश्वास पर असर पड़ सकता है।
भारत पर टैरिफ, चीन पर नरमी
निक्की हेली ने सवाल उठाया कि जब रूस से तेल खरीदने पर चीन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया, तो फिर भारत पर टैरिफ क्यों थोपे जा रहे हैं? उनके अनुसार यह नीति अमेरिका की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है और यह दिखाती है कि भारत-अमेरिका रिश्तों पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत ही वह देश है जो एशिया में चीन की बढ़ती ताकत को संतुलित कर सकता है। अगर अमेरिका ने भारत के साथ टकराव बढ़ाया, तो इसका सीधा फायदा चीन को मिलेगा।
ट्रम्प प्रशासन के लक्ष्य और भारत की अहमियत
निक्की हेली ने अपने लेख में स्पष्ट किया कि ट्रम्प प्रशासन की विदेश नीति के दो बड़े मकसद हैं—पहला चीन को पीछे छोड़ना और दूसरा ताकत के बल पर विश्व शांति स्थापित करना। इन दोनों ही उद्देश्यों को पूरा करने के लिए भारत के साथ मजबूत संबंध आवश्यक हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रपति ट्रम्प को सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करनी चाहिए और रिश्तों को पटरी पर लाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

चीन की महत्वाकांक्षाओं के खिलाफ भारत सबसे मजबूत विकल्प
पूर्व राजदूत हेली का मानना है कि भारत तेजी से दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है और जल्द ही जापान को पीछे छोड़ देगा। भारत का यह उभार चीन की विस्तारवादी नीतियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा कि चीन की जनसंख्या अब तेजी से वृद्ध हो रही है, जबकि भारत की आबादी में बड़ी संख्या युवा कामकाजी वर्ग की है। यह भारत को न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी मजबूत बनाता है।
सप्लाई चेन के लिए भारत अहम
निक्की हेली ने लिखा कि वर्तमान समय में अमेरिका अपनी सप्लाई चेन को चीन से हटाने की कोशिश कर रहा है। कपड़ों, सस्ते मोबाइलों और सौर ऊर्जा उपकरणों जैसे क्षेत्रों में भारत ही चीन का सबसे बड़ा विकल्प बन सकता है। इसीलिए भारत के साथ साझेदारी केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि आर्थिक दृष्टिकोण से भी जरूरी है।
लोकतंत्र होने से भारत दुनिया के लिए खतरा नहीं
हेली ने कहा कि भारत का उभार चीन से बिल्कुल अलग है। जहां चीन का उदय दुनिया के लिए खतरा बनता है, वहीं भारत का उभार अवसर पैदा करता है क्योंकि भारत लोकतांत्रिक देश है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को भारत को वही महत्व और संसाधन देने चाहिए, जो वह चीन या इज़राइल को देता है।
दशकों पुरानी दोस्ती है आधार
निक्की हेली का निष्कर्ष है कि भारत और अमेरिका की दोस्ती तथा दशकों पुराना भरोसा मौजूदा चुनौतियों को पार करने का सबसे मजबूत आधार है। अगर अमेरिका इस भरोसे को तोड़ता है, तो यह न केवल दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के लिए अवसर भी पैदा करेगा।
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