सुपरमैन की नई फिल्म में हीरो नहीं, सिर्फ हार और इमोशन; क्रिप्टो बना असली स्टार
जब भी हम "सुपरमैन" का नाम सुनते हैं तो एक ऐसे शक्तिशाली सुपरहीरो की छवि आंखों में उभरती है, जो पल भर में संकट टाल दे, बुरे लोगों को धूल चटा दे और जनता का मसीहा बन जाए। लेकिन जेम्स गन के निर्देशन में बनी सुपरमैन की नई फिल्म इस छवि से बहुत दूर निकल गई है। यह फिल्म एक ऐसे सुपरहीरो को सामने लाती है, जो ना सिर्फ लगातार हारता है बल्कि पूरे समय खुद को ही साबित करने में लगा रहता है।
कहानी: सुपर हीरो नहीं, 'डफरमैन' की कहानी
फिल्म की कहानी जरहानपुर नामक काल्पनिक जगह को लेकर है, जहां सुपरमैन लोगों को विदेशी हमले से बचाना चाहता है। अमेरिका का एक मित्र देश बोराविया वहां कब्जा करना चाहता है। लेकिन जैसे ही सुपरमैन इसके खिलाफ कदम उठाता है, अमेरिका के लोग भी उसी के खिलाफ हो जाते हैं।
इसी दौरान कहानी में प्रवेश करता है विलेन लेक्स लूथर, एक बिजनेसमैन जो सुपरमैन से जलता है और लोगों की सोच को उसके खिलाफ मोड़ देता है। पूरी फिल्म में सुपरमैन बार-बार खुद को निर्दोष साबित करने और अमेरिकियों का भरोसा वापस पाने में ही उलझा रहता है।
कहानी बेहद सीधी, बच्चों जैसी और कहीं-कहीं राजनीतिक षड्यंत्र से भरपूर लगती है, जिससे यह तय कर पाना मुश्किल हो जाता है कि फिल्म वयस्कों के लिए है या बच्चों के लिए।
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एक्टिंग: सुपरडॉग क्रिप्टो ने मारी बाजी
इस बार सुपरमैन की भूमिका में डेविड कोरेन्सवेट नजर आते हैं। उनका लुक ठीक-ठाक है, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, आप उन्हें लगातार पिटते हुए देखकर निराश होने लगते हैं। उनका किरदार ऐसा लगता है जैसे किसी आम आदमी को सुपरमैन का कॉस्ट्यूम पहना दिया गया हो।
लुईस लेन के रोल में राचेल ब्रोसनाहन की परफॉर्मेंस संतोषजनक है। दोनों की केमिस्ट्री अच्छी लगती है लेकिन कहानी की कमजोरी उनके अभिनय को ढक लेती है।
वहीं विलेन लेक्स लूथर की भूमिका में निकोलस हॉल्ट नजर आते हैं। हालांकि उनका अभिनय औसत है, लेकिन उनका किरदार ही सही से लिखा नहीं गया। दर्शकों को उनसे वैसा प्रभाव नहीं मिल पाता जैसा एक खतरनाक विलेन से उम्मीद होती है।
पूरी फिल्म में सबसे दमदार किरदार ‘सुपरडॉग क्रिप्टो’ का है। पूरी तरह VFX से बना ये कैरेक्टर जब भी स्क्रीन पर आता है, मुस्कान जरूर लाता है। कई बार तो यही लगता है कि फिल्म में असली हीरो वही है।
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डायरेक्शन और म्यूजिक: जेम्स गन की सबसे कमजोर फिल्म?
जेम्स गन को ‘गार्डियंस ऑफ गैलेक्सी’, ‘स्पाइडरमैन: होमकमिंग’ जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार उन्होंने दर्शकों को निराश किया है। फिल्म के टोन में स्पष्टता की कमी है — ना यह पूरी तरह बच्चों की फिल्म बन पाई है, और ना ही वयस्कों के लिए कोई गहराई ला पाई है।
बैकग्राउंड म्यूजिक भी औसत है। कोई भी सीन ऐसा नहीं है जो थियेटर में तालियां बटोर सके या आपको रोमांचित कर दे। जबकि इंडियन ऑडियंस को "बाहुबली", "रॉकी", "पुष्पा" जैसे कैरेक्टर कहीं ज़्यादा जोश से भर देते हैं।
VFX जरूर दमदार है, जो हॉलीवुड फिल्मों की एक मजबूत खासियत रही है, लेकिन जब कहानी और किरदार कमजोर हों, तो तकनीक भी आपको नहीं बचा सकती।
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देखें या नहीं?
अगर आप एक ऐसे सुपरमैन को देखने की सोच रहे हैं जो हर मुश्किल में सिर्फ रोता है, हारता है और बार-बार खुद को साबित करने की कोशिश करता है, तो यह फिल्म आपके लिए है। लेकिन अगर आप उस पुराने शक्तिशाली और प्रेरक सुपरमैन की तलाश में हैं, तो यह फिल्म आपको निराश करेगी।
बच्चों के लिए यह फिल्म ठीक-ठाक हो सकती है, खासकर क्रिप्टो के किरदार की वजह से, लेकिन ध्यान रखें कि फिल्म में दो किसिंग सीन भी हैं, इसलिए परिवार के साथ देखने से पहले विचार करें।
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