गृह मंत्रालय की गजट अधिसूचना जारी, अब राज्य में चार समितियां करेंगी अंतिम फैसला

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत दायर नागरिकता आवेदनों के त्वरित निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल में दो अतिरिक्त सशक्त समितियों का गठन किया है। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में गजट अधिसूचना जारी कर दी है। इस निर्णय के बाद राज्य में अब कुल चार सशक्त समितियां काम करेंगी, जो सीएए के तहत आने वाले आवेदनों पर अंतिम निर्णय लेंगी।

गृह मंत्रालय के अनुसार, इन नई समितियों का गठन 20 फरवरी को जारी अधिसूचना के अनुरूप किया गया है। दोनों अतिरिक्त समितियों की अध्यक्षता पश्चिम बंगाल में जनगणना संचालन निदेशालय के उप रजिस्ट्रार जनरल करेंगे। इससे पहले मार्च 2024 में गठित मूल सशक्त समिति भी कार्यरत है, जिसकी अध्यक्षता राज्य के जनगणना संचालन निदेशक करते हैं।

आवेदनों के निपटारे में तेजी लाने का उद्देश्य

सरकार का कहना है कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में नागरिकता आवेदन लंबित हैं। ऐसे में अतिरिक्त समितियों के गठन से प्रक्रिया को तेज करने और आवेदनों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

सीएए के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है, बशर्ते वे 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश कर चुके हों।

लाखों प्रवासियों को राहत की उम्मीद

पश्चिम बंगाल उन राज्यों में शामिल है जहां बड़ी संख्या में शरणार्थी समुदाय के लोग बसे हुए हैं। नई समितियों के गठन को उन आवेदकों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो लंबे समय से नागरिकता आवेदन के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि समितियां दस्तावेजों की जांच, पात्रता निर्धारण और अंतिम निर्णय की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से संचालित करेंगी।

राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व

सीएए को लेकर देश में पहले भी व्यापक बहस और विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। ऐसे में पश्चिम बंगाल में अतिरिक्त समितियों का गठन प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। केंद्र सरकार का तर्क है कि यह कानून मानवीय आधार पर लाया गया है और पात्र लोगों को नागरिकता प्रदान करना इसकी प्राथमिकता है।

अब चार सशक्त समितियों के सक्रिय होने से उम्मीद जताई जा रही है कि लंबित आवेदनों के निपटारे में गति आएगी और प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित होगी।