ग्रीन कवर बढ़ाने को बताया सबसे प्रभावी दीर्घकालिक समाधान, विशेषज्ञ समिति के पुनर्गठन का आदेश
नई दिल्ली । नई दिल्ली में वायु प्रदूषण के गंभीर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि दिल्ली-एनसीआर में अधिक पेड़ लगाए जाएं तो वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार संभव है। अदालत ने यह टिप्पणी रिज क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की भरपाई के लिए चलाए जा रहे वृक्षारोपण कार्यक्रम की निगरानी हेतु गठित विशेषज्ञ समिति के पुनर्गठन से संबंधित आदेश पारित करते समय की।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने माना कि वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए हरित आवरण बढ़ाना एक व्यावहारिक और दीर्घकालिक उपाय है। अदालत ने कहा कि जब प्रदूषण नियंत्रण के विभिन्न उपायों पर काम किया जा रहा है, तब ग्रीन कवर का विस्तार सबसे प्रभावी समाधान में से एक हो सकता है।
एमिकस क्यूरी ने रखा समिति पुनर्गठन का प्रस्ताव
इस मामले में न्यायालय द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी वरिष्ठ अधिवक्ता गुरु कृष्ण कुमार ने पीठ के समक्ष विशेषज्ञ समिति में परिवर्तन का अनुरोध रखा। उन्होंने बताया कि समिति के सदस्य ईश्वर सिंह को हाल ही में राष्ट्रीय हरित अधिकरण का सदस्य नियुक्त किया गया है, जिससे उनके स्थान पर नए सदस्य की नियुक्ति आवश्यक हो गई है।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने दो नाम सुझाए, जिनमें से पीठ ने सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी एम.डी. सिन्हा को समिति में शामिल करने का निर्णय लिया। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि विशेषज्ञ समिति को पूर्व में दिए गए आदेशों के अनुपालन की निगरानी की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है।
ग्रीन बेल्ट विस्तार कार्यक्रम की निगरानी
एमिकस क्यूरी ने अदालत को अवगत कराया कि पूर्व में एक पीठ द्वारा दिल्ली के ग्रीन बेल्ट क्षेत्र के विस्तार के लिए निर्देश जारी किए गए थे। अब यह अनुरोध किया गया है कि वर्तमान विशेषज्ञ समिति उस कार्यक्रम की भी निगरानी करे, ताकि ग्रीन कवर बढ़ाने की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सके।
मुख्य न्यायाधीश ने मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताते हुए कहा कि यह विषय सीधे तौर पर दिल्ली के वायु गुणवत्ता सूचकांक से जुड़ा है और दोनों के बीच स्पष्ट संबंध है। उन्होंने कहा कि हरित क्षेत्र में वृद्धि का सकारात्मक प्रभाव अवश्य पड़ेगा।
प्रदूषण नियंत्रण में दीर्घकालिक दृष्टिकोण की जरूरत
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र लंबे समय से वायु प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है। सर्दियों के महीनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। अदालत की टिप्पणी इस बात पर बल देती है कि केवल तात्कालिक उपाय पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि दीर्घकालिक और संरचनात्मक समाधान आवश्यक हैं।
हरित आवरण बढ़ाने से न केवल कार्बन अवशोषण में मदद मिलती है, बल्कि शहरी तापमान को नियंत्रित करने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी योगदान मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वृक्षारोपण अभियान को वैज्ञानिक ढंग से और निरंतर निगरानी के साथ लागू किया जाए, तो राजधानी की वायु गुणवत्ता में धीरे-धीरे सुधार संभव है।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी प्रदूषण नियंत्रण के व्यापक प्रयासों के बीच एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखी जा रही है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
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