संभल में न्यायालय परिसर के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम, ऐतिहासिक और संवेदनशील मामले पर टिकी निगाहें
संभल। शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद से जुड़े बहुचर्चित और संवेदनशील मामले में एक बार फिर सुनवाई टल गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले से लगाए गए स्टे के कारण गुरुवार को प्रस्तावित सुनवाई नहीं हो सकी। अब न्यायालय ने इस मामले में 24 फरवरी की अगली तारीख तय की है। सुनवाई की तारीख को लेकर पहले से ही तनाव की आशंका को देखते हुए न्यायालय परिसर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात रहा।
चंदौसी की अदालत में होनी थी सुनवाई
यह मामला जनपद संभल के चंदौसी स्थित सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में विचाराधीन है। गुरुवार को इस प्रकरण में सुनवाई निर्धारित थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के चलते निचली अदालत में कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य सिंह के न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 फरवरी की तिथि नियत की है। अदालत के इस आदेश के बाद अब सभी पक्षों की निगाहें अगली तारीख पर टिकी हुई हैं।
सुप्रीम कोर्ट के स्टे के कारण रुकी कार्यवाही
शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर को लेकर चल रहे इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्टे दिया हुआ है। इसी कारण निचली अदालत में सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। कानूनी जानकारों का कहना है कि जब तक शीर्ष अदालत से कोई नया निर्देश या स्टे में बदलाव नहीं होता, तब तक इस मामले में निचली अदालत सीमित दायरे में ही कार्यवाही कर सकती है। यही वजह है कि बार-बार तारीखें आगे बढ़ रही हैं।
19 नवंबर 2024 को दायर हुआ था वाद
यह विवाद 19 नवंबर 2024 को उस समय सामने आया था, जब शाही जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए अदालत में वाद दायर किया गया। इस वाद को कैला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरी, अधिवक्ता हरिशंकर जैन सहित कुल आठ लोगों ने दाखिल किया था। याचिका में दावा किया गया था कि जिस स्थान पर वर्तमान में शाही जामा मस्जिद स्थित है, वह प्राचीन काल में हरिहर मंदिर के रूप में जाना जाता था।
धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से संवेदनशील मामला
शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद को संभल ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में एक संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है। इस कारण प्रशासन हर सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। गुरुवार को भी अदालत परिसर के आसपास पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी रही, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
प्रशासन की सतर्कता, कानून-व्यवस्था पर नजर
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर तारीख पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ अतिरिक्त बल भी तैनात किया जाता है, ताकि अफवाहों या किसी भी तरह की तनावपूर्ण स्थिति को समय रहते नियंत्रित किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
24 फरवरी की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब इस मामले में अगली सुनवाई 24 फरवरी को होनी है। हालांकि, यह भी स्पष्ट नहीं है कि तब तक सुप्रीम कोर्ट के स्टे में कोई बदलाव होगा या नहीं। यदि शीर्ष अदालत से कोई नया आदेश आता है, तो उसी के अनुरूप आगे की कार्यवाही तय होगी। फिलहाल, शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद में कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित रास्ते पर चलते हुए अगली तारीख का इंतजार कर रही है।
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