राजद और परिवार के भीतर चल रही सियासी खींचतान पर भावुक टिप्पणी, इशारों में अपनों पर लगाए गंभीर आरोप

पटना। राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति और लालू परिवार के भीतर चल रही खींचतान एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने शनिवार को पार्टी और परिवार के भीतर चल रही कथित सियासी उठापटक को लेकर गहरी पीड़ा और नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि किसी बड़ी और मजबूत विरासत को नष्ट करने के लिए बाहरी दुश्मनों की जरूरत नहीं होती, बल्कि अपने ही लोग और कुछ षड्यंत्रकारी ही काफी होते हैं।

रोहिणी आचार्य का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब राजद के भीतर नेतृत्व, भविष्य की राजनीति और पारिवारिक समीकरणों को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। उनके शब्दों को पार्टी और परिवार के अंदरूनी मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया पोस्ट में छलका दर्द

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक लंबा और भावनात्मक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि बड़ी शिद्दत और संघर्ष से खड़ी की गई विरासत को मिटाने के लिए परायों की जरूरत नहीं पड़ती। अपने ही लोग, और कुछ ऐसे लोग जो नए-नए अपने बने हैं, वही इस काम को अंजाम देने के लिए काफी होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हैरानी तब होती है, जब जिनकी पहचान और वजूद उसी विरासत से बना हो, वही लोग बहकावे में आकर उस पहचान और वजूद के निशानों को मिटाने पर आमादा हो जाते हैं। रोहिणी ने अपने संदेश में यह भी लिखा कि जब विवेक पर पर्दा पड़ जाता है और अहंकार सिर चढ़कर बोलने लगता है, तब विनाशक ही आंख, कान और नाक बनकर इंसान की बुद्धि और विवेक को हर लेता है। उनके इन शब्दों को सत्ता, अहंकार और आंतरिक साजिशों की ओर इशारा माना जा रहा है।

पहले भी उठा चुकी हैं परिवार और पार्टी पर सवाल

यह पहला मौका नहीं है, जब रोहिणी आचार्य ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की हो। इससे पहले बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की करारी हार के बाद उन्होंने अपने भाई तेजस्वी यादव और उनके करीबी सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उस समय रोहिणी ने न केवल परिवार से दूरी बनाने की बात कही थी, बल्कि राजनीति छोड़ने तक की घोषणा कर दी थी। उन्होंने खुद को अपमानित और प्रताड़ित बताया था। रोहिणी का कहना था कि उन्हें इस कदर मानसिक रूप से तोड़ा गया कि उनके ऊपर चप्पल तक फेंककर मारी गई। उन्होंने यह भी कहा था कि एक बेटी, एक बहन, एक शादीशुदा महिला और एक मां के रूप में उन्हें गंदी गालियां दी गईं और अपमान सहना पड़ा।

‘मायका छुड़वा दिया गया’, भावुक आरोप

रोहिणी आचार्य ने अपने पुराने पोस्ट में लिखा था कि उन्होंने अपने आत्मसम्मान से कभी समझौता नहीं किया और न ही सच से पीछे हटीं, लेकिन इसी वजह से उन्हें बेइज्जती झेलनी पड़ी। उन्होंने कहा था कि एक बेटी मजबूरी में अपने रोते हुए माता-पिता और बहनों को छोड़कर चली गई। उनके शब्दों में, उनसे उनका मायका छीन लिया गया और उन्हें अनाथ जैसा बना दिया गया। उनका यह बयान बिहार की राजनीति में भावनात्मक हलचल पैदा करने वाला रहा है। रोहिणी ने यह भी लिखा था कि कोई भी उनके जैसे रास्ते पर न चले और किसी घर में रोहिणी जैसी बेटी या बहन पैदा न हो, यह बात उनके दर्द की गहराई को दर्शाती है।

राजद की विरासत और अंदरूनी कलह

राजद की पहचान सामाजिक न्याय, पिछड़े और वंचित वर्गों की राजनीति से जुड़ी रही है। लालू प्रसाद यादव ने दशकों की राजनीतिक तपस्या से पार्टी की एक मजबूत विरासत खड़ी की। ऐसे में उसी परिवार से उठी यह आवाज, जो उस विरासत के टूटने और बिखरने की बात कर रही है, पार्टी के लिए भी गंभीर संकेत मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रोहिणी आचार्य का यह बयान केवल व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि राजद के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष और नेतृत्व की खींचतान की झलक भी है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह बयान पार्टी की राजनीति पर क्या असर डालता है और लालू परिवार के भीतर चल रही दरार किस दिशा में जाती है।