नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात और ईरान पर अमेरिका व इजरायल के हमलों के बाद उत्पन्न तनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार रात सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की अहम बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्चस्तरीय बैठक में क्षेत्रीय स्थिति, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संभावित आपातकालीन योजनाओं पर व्यापक मंथन किया गया।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरान पर हुए हमलों और उसके बाद बढ़े तनाव के असर का आकलन किया गया। विशेष रूप से खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की गई। विदेशों से भारतीयों की सुरक्षित वापसी, उड़ानों में व्यवधान और आपात स्थिति से निपटने के विकल्पों पर भी चर्चा हुई।
नेतन्याहू से बातचीत, शत्रुता समाप्त करने पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से टेलीफोन पर बातचीत की। इस संवाद में प्रधानमंत्री ने हाल के घटनाक्रमों पर भारत की चिंताओं से अवगत कराया और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने तनाव को शीघ्र समाप्त करने और क्षेत्रीय शांति की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत शत्रुता के जल्द अंत, संवाद की बहाली और स्थिरता के समर्थन में है। क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर न केवल संबंधित देशों बल्कि वैश्विक समुदाय पर भी पड़ सकता है, इसलिए कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
यूएई के राष्ट्रपति से भी हुई बात
प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से भी बातचीत की। उन्होंने यूएई पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की और जानमाल की हानि पर संवेदना व्यक्त की। साथ ही इस कठिन समय में यूएई के साथ भारत की एकजुटता दोहराई।
प्रधानमंत्री ने यूएई में रह रहे भारतीय समुदाय की देखभाल के लिए वहां की सरकार का आभार जताया और कहा कि भारत क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता का समर्थन करता है।
सीसीएस बैठक में व्यापक समीक्षा
अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक प्रधानमंत्री के दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद रात करीब साढ़े नौ बजे शुरू हुई। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
शीर्ष अधिकारियों ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और भारत पर संभावित प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी। विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्गों और हवाई सेवाओं पर पड़ने वाले असर पर चर्चा की गई।
तनाव बढ़ने के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं, जिससे सैकड़ों भारतीय दुबई और अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से कई लोगों ने सरकार से सहायता की अपील की है। खाड़ी क्षेत्र में एक करोड़ से अधिक भारतीय नागरिक काम करते और निवास करते हैं। ईरान में लगभग दस हजार और इजरायल में चालीस हजार से अधिक भारतीय नागरिक रहते हैं। स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए आपातकालीन योजनाओं की समीक्षा की जा रही है।
कूटनीतिक संपर्क तेज
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी से टेलीफोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय स्थिति पर विचार-विमर्श किया। इससे पहले उन्होंने इजरायल, सऊदी अरब, कुवैत और ईरान समेत कई देशों के विदेश मंत्रियों से संपर्क साधा था। भारत की कोशिश है कि क्षेत्र में जल्द से जल्द तनाव कम हो और संवाद बहाल हो। पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम को देखते हुए भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्राथमिकता भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
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