घर-घर सूचीकरण और आवास जनगणना से होगी शुरुआत, अंतिम जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में
नई दिल्ली।ओडिशा में जनगणना 2026-27 की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। राज्य में जनगणना का पहला चरण अप्रैल 2026 से शुरू किया जाएगा, जिसमें घरों की सूची तैयार करने और आवास जनगणना का कार्य किया जाएगा। इस विशाल प्रशासनिक और सामाजिक प्रक्रिया के लिए लगभग एक लाख गणनाकर्ताओं और 15 हजार पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। यह जानकारी राज्य स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक के बाद अधिकारियों द्वारा साझा की गई।
पहला चरण: घरों की सूची और आवास जनगणना
ओडिशा में जनगणना संचालन के निदेशक निखिल पवन कल्याण ने बताया कि पहला चरण अप्रैल और मई 2026 के बीच लगभग एक महीने की अवधि में पूरा किया जाएगा। इस चरण में राज्य के प्रत्येक गांव, कस्बे और शहरी क्षेत्र में घरों की सूची बनाई जाएगी और आवास संबंधी विवरण दर्ज किए जाएंगे। यह चरण इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी आधार पर आगे होने वाली वास्तविक जनसंख्या गणना की रूपरेखा तय होती है। यदि इस चरण में कोई घर या परिवार छूट जाता है, तो आगे की गणना प्रभावित हो सकती है, इसलिए प्रशासन इसे अत्यंत सावधानी और सटीकता के साथ पूरा करने की तैयारी में है।
फरवरी 2027 में होगी अंतिम जनसंख्या गणना
निखिल पवन कल्याण ने स्पष्ट किया कि इस मूलभूत चरण के बाद प्राथमिक जनसंख्या गणना का कार्य 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच अनिवार्य रूप से कराया जाएगा। इसके बाद मार्च 2027 की शुरुआत में एक संक्षिप्त पुनरीक्षण अवधि रखी जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य का कोई भी नागरिक इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया से वंचित न रह जाए। अधिकारियों का कहना है कि पुनरीक्षण चरण में छूटे हुए नामों और विवरणों को जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
एक लाख गणनाकर्मी और 15 हजार पर्यवेक्षक
राज्य सरकार और केंद्र सरकार के समन्वय से इस बार जनगणना के लिए बड़े पैमाने पर मानव संसाधन जुटाया गया है। लगभग एक लाख गणनाकर्मी घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे, जबकि 15 हजार पर्यवेक्षक पूरे कार्य की निगरानी करेंगे। प्रत्येक गणनाकर्मी को औसतन लगभग 200 घरों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिनमें करीब 800 लोगों की जानकारी दर्ज की जाएगी। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि किसी भी कर्मचारी पर अत्यधिक बोझ न पड़े और आंकड़ों की गुणवत्ता बनी रहे।
प्रशिक्षण और प्रोत्साहन पर विशेष जोर
जनगणना में शामिल होने वाले गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों के लिए जनवरी, फरवरी और मार्च 2026 में चरणबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण सत्रों में उन्हें डिजिटल उपकरणों के उपयोग, डेटा सुरक्षा, नागरिकों से संवाद की प्रक्रिया और नियमों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक गणनाकर्ता को उनकी सेवाओं के लिए 25 हजार रुपये का वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाएगा, ताकि वे पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ इस राष्ट्रीय कार्य को संपन्न कर सकें।
शहरी क्षेत्रों में प्रारंभिक सर्वे पूरा
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार भुवनेश्वर और कटक में प्रारंभिक सर्वेक्षण का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही नव घोषित राष्ट्रीय परिषदों और नगरपालिकाओं की सीमाएं भी अंतिम रूप ले चुकी हैं। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि जनगणना के दौरान प्रशासनिक सीमाओं को लेकर किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होगी और कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ेगा।
90 प्रतिशत डेटा होगा डिजिटल
इस बार की जनगणना में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। निखिल पवन कल्याण ने बताया कि लगभग 90 प्रतिशत डेटा डिजिटल माध्यम से एकत्र किया जाएगा। गणनाकर्मी टैबलेट या मोबाइल आधारित एप के माध्यम से जानकारी दर्ज करेंगे, जिससे आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी और समय की भी बचत होगी। नागरिक चाहें तो आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ओटीपी आधारित मोबाइल सत्यापन प्रणाली के माध्यम से स्वयं भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक मोबाइल नंबर का उपयोग केवल एक बार ही किया जा सकेगा और डेटा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए एप में स्क्रीनशॉट जैसी सुविधाएं बंद कर दी जाएंगी।
प्रशासन का दावा: कोई भी नागरिक नहीं छूटेगा
राज्य और केंद्र सरकार का दावा है कि इस बार की जनगणना पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और समावेशी होगी। डिजिटल तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और सख्त निगरानी व्यवस्था के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि ओडिशा का कोई भी नागरिक इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया से बाहर न रह जाए। जनगणना के आंकड़े न केवल जनसंख्या का सही चित्र प्रस्तुत करेंगे, बल्कि भविष्य की योजनाओं, विकास कार्यक्रमों और संसाधनों के न्यायसंगत वितरण की दिशा भी तय करेंगे।
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