डोलगाम इलाके में घेराबंदी, भारी बर्फबारी के बीच सेना, पुलिस और सीआरपीएफ का संयुक्त अभियान तेज

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों का अभियान एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार सुबह किश्तवाड़ के डोलगाम इलाके में छिपे आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, तीन आतंकी पिछले करीब एक सप्ताह से इस दुर्गम क्षेत्र में छिपे हुए थे और मौके की तलाश में थे। आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिलने के बाद सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने संयुक्त रूप से पूरे इलाके को घेर लिया और सर्च ऑपरेशन को मुठभेड़ में तब्दील कर दिया।

खुफिया इनपुट के बाद ऑपरेशन त्राशी-I को मिली गति

भारतीय सेना की White Knight Corps के अनुसार, कश्मीर पुलिस और Central Reserve Police Force को डोलगाम क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी का ठोस इनपुट मिला था। इसी के आधार पर ‘ऑपरेशन त्राशी-I’ के तहत इलाके में बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू किया गया। जैसे ही सुरक्षाबल संदिग्ध स्थानों की ओर बढ़े, आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। पूरे इलाके में सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया है और आतंकियों को भागने से रोकने के लिए सभी संभावित रास्तों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

सुरक्षा के मद्देनज़र संचार सेवाएं बंद

ऑपरेशन के दौरान किसी भी तरह की अफवाह और आतंकी नेटवर्क को सूचना लीक होने से रोकने के लिए प्रशासन ने एहतियातन कदम उठाए हैं। सिंहपोरा, चिंगम और चतरू क्षेत्रों को कवर करने वाले लगभग छह किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं। इससे आम लोगों को असुविधा जरूर हुई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह कदम ऑपरेशन की संवेदनशीलता को देखते हुए जरूरी है।

पंद्रह दिनों में चौथी मुठभेड़, इलाका बना आतंकियों का गढ़

किश्तवाड़ और आसपास के इलाके पिछले कुछ समय से आतंकवाद विरोधी अभियानों का केंद्र बने हुए हैं। बीते पंद्रह दिनों में यह चौथी बार है जब सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हो रही है। ऑपरेशन त्राशी-I की शुरुआत 18 जनवरी को हुई थी, जब मंडराल-सिंहपोरा के पास सोनार जंगल में एक भीषण मुठभेड़ हुई थी। उस दौरान एक पैराट्रूपर शहीद हो गया था और सात अन्य सैनिक घायल हुए थे। हालांकि, उस वक्त आतंकी घने जंगल और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का फायदा उठाकर फरार हो गए थे। 

Kishtwar, Jammu And Kashmir Encounter: Encounter Underway Between  Terrorists, Security Forces In Jammu And Kashmir's Kishtwar

भारी बर्फबारी भी नहीं रोक पाई सुरक्षाबलों के हौसले

किश्तवाड़ के ऊंचाई वाले इलाकों में इस समय लगातार बर्फबारी हो रही है। कई जगहों पर दो फीट से अधिक बर्फ जमी हुई है, जिससे सामान्य आवाजाही भी बेहद मुश्किल हो गई है। इसके बावजूद सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन में कोई ढील नहीं दी है। जवान कठिन मौसम और जोखिम भरे हालात में भी आतंकियों की तलाश में जंगलों और पहाड़ियों की खाक छान रहे हैं। 22 जनवरी को माली दाना टॉप और 25 जनवरी को जनसीर-कंडीवार इलाके में भी इसी तरह की मुठभेड़ें हुई थीं, लेकिन हर बार आतंकी जंगलों के भीतर छिपने में सफल रहे।

सात महीनों में छह मुठभेड़ें, पाकिस्तानी आतंकियों पर शिकंजा

किश्तवाड़ जिले में पिछले सात महीनों के दौरान आतंकियों के साथ छह मुठभेड़ें हो चुकी हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस क्षेत्र में सक्रिय आतंकी मुख्य रूप से सीमा पार से आए हुए हैं और पहाड़ी व जंगली इलाकों को अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। किश्तवाड़ का इलाका डोडा और उधमपुर जिलों से सटा हुआ है, जिससे आतंकियों को एक जिले से दूसरे जिले में मूवमेंट का मौका मिलता रहा है। हालांकि, लगातार चल रहे अभियानों से अब उनके नेटवर्क पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

ऑपरेशन जारी, निर्णायक कार्रवाई की उम्मीद

फिलहाल डोलगाम इलाके में मुठभेड़ जारी है और सुरक्षाबलों ने आतंकियों को चारों ओर से घेर रखा है। अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा, जब तक इलाके को पूरी तरह आतंकियों से मुक्त नहीं कर दिया जाता। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षा बलों के साथ सहयोग बनाए रखें।