पहली विदेश तैनाती में दिखा भारत का समुद्री आत्मनिर्भरता का स्वरूप

नई दिल्ली, 28 नवंबर। श्रीलंका नौसेना की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भारत के दो स्वदेशी युद्धपोत—एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत और स्टील्थ फ्रिगेट उदयगिरि—ने भारत की समुद्री शक्ति, तकनीकी क्षमता और क्षेत्रीय सहयोग के संदेश को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया है। हिंद महासागर क्षेत्र में यह दोनों जहाजों की पहली विदेश तैनाती है, जो भारत की समुद्री नीति में आत्मनिर्भरता, मित्रता और स्थिरता के बढ़ते महत्व को उजागर करती है।

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आईएनएस विक्रांत की मौजूदगी ने बढ़ाया समारोह का महत्व

भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत श्रीलंका नौसेना के अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में पहली बार शामिल हुआ। यह मौका न केवल भारत–श्रीलंका रक्षा साझेदारी की मजबूती का संकेत है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती समुद्री भूमिका को भी परिभाषित करता है। श्रीलंका पहुंचने पर विक्रांत को जिस सम्मान के साथ स्वागत मिला, उसने दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और भरोसेमंद रिश्तों को और गहराई दी।

श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा द्वारा विक्रांत पर आयोजित रिसेप्शन में श्रीलंका के स्वास्थ्य और मीडिया मंत्री तथा चीफ व्हिप नलिंडा जयतिस्सा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने विक्रांत की पहली विदेश यात्रा को दोनों देशों की साझा सुरक्षा दृष्टि और ऐतिहासिक मित्रता का प्रतीक बताया।

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उदयगिरि की पहली अंतरराष्ट्रीय भागीदारी : भारत की उन्नत नौसैनिक क्षमता का संकेत

भारतीय नौसेना के बेड़े में हाल ही में शामिल स्टील्थ फ्रिगेट उदयगिरि भी पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग ले रहा है। यह न केवल आधुनिक भारतीय नौसैनिक निर्माण क्षमता का परिचय देता है, बल्कि भारत की समुद्री उपस्थिति को संतुलित रूप से विस्तार देने की नीति को भी दर्शाता है। जहाज पर उन्नत तकनीक और आधुनिक हथियार प्रणालियां भारत की बढ़ती रणनीतिक क्षमता को रेखांकित करती हैं।

फ्लीट रिव्यू में भारत की सक्रिय सहभागिता

27 से 29 नवंबर तक चल रहे श्रीलंकाई अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में कई देशों की नौसेनाओं की भागीदारी है। इस दौरान भारतीय जहाज विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें सेरेमोनियल फ्लीट रिव्यू, सिटी परेड, व्यावसायिक नौसैनिक मुलाकातें और सामुदायिक आउटरीच गतिविधियां शामिल हैं।
सार्वजनिक पहुँच गतिविधियों के तहत दोनों भारतीय युद्धपोत आगंतुकों के लिए भी खुले रखे जाएंगे, जिससे क्षेत्रीय सहयोग और पारस्परिक समझ को और बढ़ावा मिलेगा।

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क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और इंटरऑपरेबिलिटी पर भारत का फोकस

भारत का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में मजबूत समुद्री सहयोग ही स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है। आईएनएस विक्रांत और उदयगिरि की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति इस नीति का स्पष्ट प्रमाण है। यह तैनाती भारत की उस रणनीतिक प्रतिबद्धता को मजबूती देती है जिसके तहत वह साझेदार देशों के साथ इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाकर समुद्री सुरक्षा संरचना को अधिक मजबूत बनाना चाहता है।

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