एफडीटीएल नियमों से छूट खत्म होने पर इंडिगो की परिचालन क्षमता पर सवाल, सरकार नहीं लेना चाहती कोई जोखिम

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के सामने अगले महीने से एक बड़ी चुनौती खड़ी होने जा रही है। 10 फरवरी को इंडिगो के ए320 फ्लीट के पायलटों को मिली फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी एफडीटीएल नियमों से छूट समाप्त हो रही है। इसके बाद एयरलाइन को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय डीजीसीए को साफ तौर पर यह बताना होगा कि क्या वह नए और सख्त नियमों के तहत भी रोजाना 2,000 से अधिक उड़ानों का संचालन कर पाएगी या नहीं। यदि एयरलाइन इस क्षमता को बनाए रखने में असफल रहती है, तो डीजीसीए और नागरिक उड्डयन मंत्रालय सीधे हस्तक्षेप करते हुए उड़ानों में कटौती का फैसला ले सकते हैं। पिछले वर्ष दिसंबर में इंडिगो की सैकड़ों उड़ानों के अचानक रद्द होने से लाखों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। कई यात्री घंटों एयरपोर्ट पर फंसे रहे और उड़ानों की अनिश्चितता के कारण व्यापक अव्यवस्था देखने को मिली। उसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार सरकार और नियामक संस्थाएं किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं।

एफडीटीएल नियमों में बदलाव से बढ़ी पायलटों की मांग

नए एफडीटीएल नियमों का मुख्य उद्देश्य उड़ानों की सुरक्षा बढ़ाना और पायलटों को पर्याप्त आराम सुनिश्चित करना है। इन नियमों के तहत साप्ताहिक विश्राम अवधि को 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया गया है। इसके अलावा रात की उड़ानों के दौरान लैंडिंग की संख्या पर सीमा तय की गई है और कुल ड्यूटी समय में भी कटौती की गई है। इन बदलावों का सीधा असर एयरलाइन की शेड्यूलिंग व्यवस्था पर पड़ा है। इंडिगो के लिए समस्या यह है कि इन नियमों के चलते उसे अपने ए320 बेड़े के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक पायलटों की जरूरत पड़ रही है। सीमित संख्या में उपलब्ध पायलटों के साथ बड़ी संख्या में उड़ानों का संचालन करना अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है। यही कारण है कि एयरलाइन इस समय हर संभावित स्थिति का आकलन कर रही है।

ड्राई रन और नई रोस्टर व्यवस्था पर काम

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इंडिगो फिलहाल लगातार ड्राई रन कर रही है। इसमें एयरलाइन अपने शेड्यूलिंग सॉफ्टवेयर के जरिए यह परख रही है कि उपलब्ध पायलटों की संख्या के साथ कितनी उड़ानों का संचालन संभव है। यह अभ्यास खास तौर पर 10 फरवरी के बाद की स्थिति को ध्यान में रखकर किया जा रहा है, जब किसी तरह की छूट लागू नहीं रहेगी।

एयरलाइन ने 1 फरवरी से ही नए एफडीटीएल नियमों के अनुसार क्रू रोस्टर बनाना शुरू कर दिया है। इसका मतलब यह है कि अभी से ही पुरानी छूट को नजरअंदाज करते हुए नई व्यवस्था के तहत संचालन की तैयारी की जा रही है। इससे यह साफ होता है कि इंडिगो संभावित संकट से बचने के लिए पहले से सतर्कता बरत रही है।

दिसंबर की अव्यवस्था और 22.2 करोड़ रुपये का जुर्माना

दिसंबर 2025 में इंडिगो की उड़ानों में आई भारी अव्यवस्था को लेकर डीजीसीए ने जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट में केवल 3, 4 और 5 दिसंबर को हुई परेशानियों को आधार बनाया गया और उसी के आधार पर इंडिगो पर 22.2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर पायलट संगठनों ने सवाल उठाए हैं।

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स का कहना है कि डीजीसीए की रिपोर्ट पूरी तस्वीर नहीं दिखाती। संगठन के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा के अनुसार, वास्तविक समस्या केवल तीन दिनों तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह मिड-दिसंबर तक जारी रही। इस दौरान हजारों उड़ानें प्रभावित हुईं और तीन लाख से अधिक यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। उनका कहना है कि केवल तीन दिनों के आंकड़ों के आधार पर स्थिति का आकलन करना जमीनी सच्चाई को कम करके आंकने जैसा है।

सरकार और नियामक एजेंसियों की सख्ती

नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए दोनों ही इस बात को लेकर गंभीर हैं कि यात्रियों को दोबारा उस तरह की अव्यवस्था का सामना न करना पड़े। यही वजह है कि इंडिगो से यह स्पष्ट जवाब मांगा जा रहा है कि वह नए नियमों के तहत अपनी मौजूदा उड़ान क्षमता को बरकरार रख पाएगी या नहीं। यदि एयरलाइन समय रहते पर्याप्त पायलटों की व्यवस्था नहीं कर पाती, तो उड़ानों में कटौती तय मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल इंडिगो तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर पूरे घरेलू विमानन क्षेत्र पर पड़ सकता है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आने वाले हफ्तों में डीजीसीए की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है।