तेजू में तीन दिवसीय संयुक्त तोपखाना अभ्यास, पर्वतीय युद्ध क्षमता और अंतर-एजेंसी समन्वय पर जोर
इटानगर। चीन सीमा से सटे अरुणाचल प्रदेश के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारतीय सेना ने अपनी युद्धक क्षमता और सामरिक तैयारी का सशक्त प्रदर्शन किया। लोहित जिले के तेजू क्षेत्र में 23 से 25 फरवरी तक तीन दिवसीय संयुक्त तोपखाना अभ्यास सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अभ्यास में भारतीय सेना के साथ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, अरुणाचल स्काउट्स, पैरा स्पेशल फोर्सेज और भैरव बटालियन ने भाग लिया।
रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि यह अभ्यास विशेष रूप से उच्च ऊंचाई वाले इलाकों में युद्ध की तैयारियों को परखने और सामरिक समन्वय को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच परिचालन तत्परता बनाए रखना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन इस संयुक्त अभ्यास ने सभी सहभागी बलों की क्षमता और तालमेल को नई मजबूती दी है।
हाई एल्टीट्यूड में रणनीतिक तैयारी की परख
अरुणाचल प्रदेश का यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। ऊंचाई, दुर्गम पर्वतीय भूभाग और बदलते मौसम के बीच सैनिकों को विशेष प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है। अभ्यास के दौरान तोपखाने की मारक क्षमता का प्रदर्शन किया गया और वास्तविक युद्ध परिस्थितियों जैसी स्थितियां निर्मित कर सैनिकों की प्रतिक्रिया और समन्वय की परीक्षा ली गई।
लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने बताया कि इस प्रशिक्षण में उन्नत प्रौद्योगिकी, अगली पीढ़ी के उपकरणों और परिष्कृत प्रक्रियाओं के एकीकरण पर विशेष बल दिया गया। इससे न केवल फायर पावर की सटीकता बढ़ी, बल्कि विभिन्न बलों के बीच संचार और रणनीतिक तालमेल भी बेहतर हुआ।
अंतर-एजेंसी समन्वय में उल्लेखनीय वृद्धि
इस संयुक्त अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच समन्वय को मजबूत करना था। भारतीय सेना, आईटीबीपी और विशेष बलों के बीच परिचालन एकीकरण से यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में संयुक्त रूप से प्रभावी कार्रवाई की जा सके। पर्वतीय क्षेत्रों में सीमावर्ती चुनौतियों को देखते हुए इस तरह के संयुक्त अभ्यासों को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अंतर-शस्त्र सहयोग की दिशा में मील का पत्थर
रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि यह अभ्यास सहभागी बलों के बीच अंतर-शस्त्र सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ है। आधुनिक युद्ध में केवल सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि तकनीकी दक्षता और समन्वित कार्रवाई भी निर्णायक भूमिका निभाती है। इस अभ्यास ने इन सभी पहलुओं को मजबूत किया है।
सामरिक संदेश और सुरक्षा प्रतिबद्धता
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन सीमा के निकट इस प्रकार का उच्च स्तरीय सैन्य अभ्यास भारत की सुरक्षा प्रतिबद्धता और तैयारी का स्पष्ट संकेत है। हालांकि यह नियमित प्रशिक्षण का हिस्सा है, लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों में आयोजित होने के कारण इसका सामरिक महत्व बढ़ जाता है। भारतीय सेना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए वह हर परिस्थिति में तैयार है और आधुनिक तकनीक तथा संयुक्त बल संरचना के साथ किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम है।
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