अस्पताल पहुंच रहे मरीज, 35 साल पुरानी जर्जर व्यवस्था पर टिकी है जलापूर्ति
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर डेल्टा-एक सहित आसपास के इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई से हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। गंदा पानी पीने और उपयोग में लेने के कारण बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ रहे हैं और अस्पतालों तक पहुंच रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डाढ़ा की डॉक्टरों की टीम सेक्टर में पहुंची और मौके पर ही बीमार लोगों का परीक्षण किया। डॉक्टरों के पास इलाज के लिए 30 से अधिक लोग पहुंचे, जिनमें से सात से आठ लोग उल्टी और दस्त जैसी गंभीर समस्याओं से पीड़ित पाए गए। डॉक्टरों ने मौके पर ही दवाइयां उपलब्ध कराईं और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी।
सीवर के गंदे पानी से बिगड़ी तबीयत
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डाढ़ा के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नारायण किशोर ने बताया कि मरीजों और स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनकी तबीयत सीवर के दूषित पानी के कारण बिगड़ी है। डॉक्टरों की टीम ने प्राथमिक उपचार के साथ-साथ लोगों को साफ पानी का ही उपयोग करने की सलाह दी है। डर और असुरक्षा के माहौल में कई परिवारों ने घरों में सप्लाई हो रहे पानी को पूरी तरह पीना बंद कर दिया है और अब बाहर से पानी मंगाकर पीने को मजबूर हैं।
सीवर ओवरफ्लो से घरों तक पहुंच रहा गंदा पानी
निवासियों का कहना है कि सेक्टर में लंबे समय से सीवर ओवरफ्लो की समस्या बनी हुई है। ओवरफ्लो सीवर का गंदा पानी लीकेज वाली जलापूर्ति लाइनों में मिलकर सीधे घरों तक पहुंच रहा है। लगातार शिकायतों के बाद प्राधिकरण की टीम मौके पर पहुंची और कुछ सेक्टरों में सीवर सफाई का अभियान चलाया गया। अधिकारियों का दावा है कि यह सफाई अभियान आगे भी जारी रहेगा, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल अस्थायी राहत है, स्थायी समाधान अब तक नहीं निकला है।
35 साल पुरानी जर्जर पाइप लाइनों का खामियाजा
ग्रेटर नोएडा में जलापूर्ति की पूरी व्यवस्था करीब 35 साल पुरानी पाइप लाइनों पर निर्भर है। शहर बसाते समय डाली गई ये लाइनें अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। जगह-जगह लीकेज के कारण सीवर का पानी पेयजल लाइनों में मिल रहा है। निवासियों का आरोप है कि इसी वजह से बीमारियां फैल रही हैं, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम नहीं किया जा रहा।
बदबू और गंदगी से जीना मुश्किल
स्थानीय लोगों ने बताया कि सीवर ओवरफ्लो होने पर गंदा पानी ड्रेनेज में छोड़ा जा रहा है। ड्रेनेज में गंदा पानी जमा रहने से पूरे दिन घरों के आसपास बदबू फैली रहती है। पानी की सप्लाई का दबाव कम होते ही लीकेज बढ़ जाती है और उसी समय सीवर का पानी घरों की टंकियों और नलों तक पहुंच जाता है। हर दूसरे दिन किसी न किसी सेक्टर में यही समस्या सामने आ रही है।
आरडब्ल्यूए ने उठाए गंभीर सवाल
सेक्टर अल्फा-2 के महासचिव एनपी सिंह ने बताया कि पिछले छह महीने से अधिक समय से उनके सेक्टर में हर घर के सामने सीवर का दूषित पानी भरा रहता है। ड्रेनेज की नियमित सफाई नहीं होने से हालात और बदतर हो गए हैं। वहीं डेल्टा-1 निवासी दीपक भाटी ने आरोप लगाया कि जब सेक्टर की सीवर लाइन खराब हुई तो प्राधिकरण ने उसे ड्रेन लाइन से जोड़ दिया। ड्रेन लाइन बिना प्लास्टर की होने के कारण मलमूत्र युक्त पानी लीकेज के जरिए सीधे घरों में सप्लाई हो रहा है। उनका कहना है कि जल विभाग के अधिकारी केवल फोटो खींचकर चले जाते हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी रहती है।
एमसील से लीकेज रोकने का अस्थायी जुगाड़
निवासियों ने बताया कि लीकेज रोकने के लिए प्राधिकरण के कर्मचारी एमसील का इस्तेमाल कर रहे हैं। पानी का दबाव बढ़ते ही यह एमसील खुल जाती है, जिससे हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है और उसी लीकेज से दूषित पानी की सप्लाई फिर शुरू हो जाती है। स्थायी समाधान के अभाव में लोग लगातार खतरे में जीने को मजबूर हैं।
हर साल बढ़ता बिल, घटती सुविधा
फेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों ने बताया कि ग्रेटर नोएडा में 35 से अधिक सेक्टर और 250 से ज्यादा सोसाइटियां हैं, जहां से प्राधिकरण हर महीने पानी का बिल वसूल रहा है। इसके बावजूद स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में अधिकारी पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। हर साल मार्च और अप्रैल में पानी के रेट में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी जाती है, लेकिन सुविधाओं में कोई सुधार नहीं होता।
डेढ़ साल से सीवर ओवरफ्लो, गंगाजल भी बंद
निवासियों के अनुसार पिछले डेढ़ साल से लगातार सीवर ओवरफ्लो की समस्या बनी हुई है। कई जगह गंगाजल की लाइनें और सामान्य जलापूर्ति लाइनें टूटी हुई हैं। लाइन टूटने से गंदा पानी वापस सप्लाई लाइन में चला जाता है, जिससे घरों तक दूषित पानी पहुंचने का खतरा बना रहता है। पिछले 6-7 महीनों से गंगाजल लाइन में लीकेज के कारण किसी भी सेक्टर में गंगाजल की आपूर्ति नहीं हो रही है और लोग मजबूरी में ग्राउंड वॉटर पी रहे हैं।
निवासियों का कहना है कि वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटन के बावजूद गंगाजल की आपूर्ति कुछ महीनों से ज्यादा नहीं चल पाई। जैसे ही गंगाजल चालू होता है, कहीं न कहीं पाइप लाइन फट जाती है और सप्लाई फिर बंद हो जाती है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
दूषित पानी से फैलती बीमारियां और जर्जर जलापूर्ति व्यवस्था अब ग्रेटर नोएडा के लिए गंभीर जनस्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। स्थानीय लोगों की मांग है कि केवल सफाई और अस्थायी मरम्मत नहीं, बल्कि पूरी जल और सीवर व्यवस्था को नए सिरे से दुरुस्त किया जाए, ताकि लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिल सके।
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