इलेक्शन आयोग ने प्रोसेस में आई देरी को देखते हुए लिया निर्णय, डिजिटलीकरण और सत्यापन कार्य तेज करने के निर्देश
देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (विशेष विस्तृत पुनरीक्षण) की अवधि को एक सप्ताह बढ़ा दिया गया है। चुनाव आयोग ने शनिवार को घोषणा करते हुए बताया कि अब मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 14 फरवरी 2026 को किया जाएगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि कई राज्यों में डिजिटलीकरण और फॉर्म सत्यापन की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
एन्यूमरेशन पीरियड अब 11 दिसंबर तक
मतदाता जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, जिसे एन्यूमरेशन पीरियड कहा जाता है, अब 11 दिसंबर तक चलेगी। इससे पहले इसकी अंतिम तिथि 4 दिसंबर तय की गई थी। इसी तरह, पहला प्रारूप सूची जिसे 9 दिसंबर को जारी किया जाना था, अब 16 दिसंबर को जारी होगी।
28 अक्टूबर से चल रही प्रक्रिया
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन की शुरुआत 28 अक्टूबर से हुई थी। इस चरण में मतदाता सूची का व्यापक अद्यतन किया जाता है:
नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं,
मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं,
और सूची में मौजूद त्रुटियों को ठीक किया जाता है।
आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का त्रुटिरहित होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद है और इसमें देरी या लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सभी 12 राज्यों को 7 दिन का अतिरिक्त समय
इलेक्शन आयोग ने कहा कि कई राज्यों से फॉर्म डिजिटलीकरण और सत्यापन में देरी की शिकायतें मिल रहीं थी। इसलिए सभी राज्यों को 7 दिन का अतिरिक्त समय दिया जा रहा है ताकि मतदाता सूची का संशोधन बिना किसी त्रुटि के पूरा हो सके। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि
मतदाताओं के नाम सही विधानसभा क्षेत्र में दर्ज हों,
सही भाग संख्या में जोड़े जाएँ,
और किसी भी नागरिक का नाम गलत तरीके से हटाया न जाए।
आयोग ने निर्देश दिया है कि यदि किसी भी क्षेत्र में गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
51 करोड़ मतदाताओं तक पहुँचे फॉर्म, 79% डेटा डिजिटलीकृत
चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बनाए गए गणना फॉर्मों में से 99.53% फॉर्म घर-घर तक पहुँचा दिए गए हैं। पूरे देश में 51 करोड़ मतदाताओं को यह फॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं।
इनमें से लगभग 79% फॉर्मों का डिजिटलीकरण पूरा कर लिया गया है। इसका मतलब है कि घर-घर जाकर बीएलओ द्वारा एकत्र किए गए नाम, पते और अन्य विवरणों को ऑनलाइन प्रणाली में दर्ज किया जा चुका है।
चुनाव आयोग ने राज्यों को चेतावनी देते हुए कहा कि यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है, इसलिए अतिरिक्त मिले समय का उपयोग पूरी गंभीरता से किया जाए। आयोग ने दोहराया कि त्रुटिरहित मतदाता सूची सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है ताकि हर पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार सुरक्षित मिल सके।
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