एक्यूआई ‘खराब’ श्रेणी में बरकरार, सोमवार से फिर बिगड़ सकती है हवा
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में नए साल के दूसरे दिन तेज हवाओं ने प्रदूषण से जूझ रहे लोगों को थोड़ी राहत दी है। हवा की दिशा बदलने और गति बढ़ने के चलते शुक्रवार को वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ से सुधरकर ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। शनिवार सुबह एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के अनुसार दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 222 दर्ज किया गया, जो अब भी स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित नहीं माना जाता।
अलग-अलग इलाकों में अलग हालात
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर अब भी चिंता का विषय बना हुआ है। आनंद विहार में एक्यूआई 282, चांदनी चौक में 272, जहांगीरपुरी में 309, मुंडका में 281 और रोहिणी में 270 दर्ज किया गया। वहीं आया नगर, बवाना, आईजीआई एयरपोर्ट टी-3 और लोधी रोड जैसे कुछ इलाकों में एक्यूआई अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन ये भी पूरी तरह सुरक्षित श्रेणी में नहीं हैं। सीपीसीबी का अनुमान है कि रविवार तक हवा ‘खराब’ श्रेणी में बनी रह सकती है, जबकि सोमवार से एक बार फिर इसके ‘बेहद खराब’ होने की आशंका जताई गई है।
सांस के मरीजों के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों के अनुसार यदि हवा दोबारा बिगड़ती है तो दमा, अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित लोगों की परेशानियां बढ़ सकती हैं। आंखों में जलन, खांसी, सिरदर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें आम हो सकती हैं। डॉक्टरों ने बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।
ग्रैप-3 की पाबंदियां हटीं, लेकिन सख्ती जारी
हवा में मामूली सुधार के बाद दिल्ली में ग्रैप-3 (GRAP-3) की पाबंदियां हटा ली गई हैं। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि इसे स्थायी राहत नहीं माना जाए। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि यह सुधार लगातार जमीनी स्तर पर की गई कार्रवाई का नतीजा है, लेकिन यह आराम करने का समय नहीं है। उन्होंने बताया कि एक दिन पहले दिल्ली का एक्यूआई 380 था, जो 24 घंटे में घटकर 236 तक आ गया। खास बात यह रही कि बवाना इलाके में एक्यूआई 141 दर्ज किया गया, जिसे अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है।
24 घंटे में बड़े पैमाने पर कार्रवाई
पर्यावरण मंत्री के अनुसार बीते 24 घंटों में प्रदूषण के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया। वाहन प्रदूषण के मामलों में 6,596 चालान काटे गए। शहरभर से करीब 12,000 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया। धूल नियंत्रण के लिए 6,261 किलोमीटर सड़कों की मशीनों से सफाई की गई। निर्माण और तोड़फोड़ से निकले 2,315 मीट्रिक टन मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया गया। अवैध कचरा डंपिंग के खिलाफ 405 स्थानों पर जांच हुई, जिनमें 156 मामलों में सख्त कार्रवाई की गई। इसके अलावा 40 प्रमुख चौराहों और सड़कों पर ट्रैफिक नियंत्रण किया गया और नियम तोड़ने वाले 99 हल्के वाहनों पर कार्रवाई की गई।
राहत अस्थायी, चुनौती बनी रहेगी
सरकार और विशेषज्ञों दोनों का मानना है कि मौजूदा सुधार अस्थायी है। मौसम की परिस्थितियां बदलीं तो प्रदूषण फिर गंभीर स्तर पर पहुंच सकता है। ऐसे में चुनौती यह है कि जो थोड़ी राहत मिली है, उसे बनाए रखा जाए और प्रदूषण के स्रोतों पर लगातार सख्ती जारी रखी जाए।
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