राजधानी के कई इलाकों में हालात गंभीर, आनंद विहार और चांदनी चौक में 400 से ऊपर पहुंचा एक्यूआई
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के लोगों को फिलहाल प्रदूषण से कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। हवा की दिशा में बदलाव और रफ्तार धीमी पड़ने के कारण शुक्रवार के बाद शनिवार को भी राजधानी की फिजा खराब से फिसलकर बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 350 के पार पहुंच गया है, जिससे आम जनजीवन पर सीधा असर पड़ रहा है। सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए हालात ज्यादा चिंताजनक बने हुए हैं।
एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, शनिवार सुबह राजधानी का औसत एक्यूआई 358 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। यह स्थिति दर्शाती है कि फिलहाल प्रदूषण का स्तर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है और इसमें तत्काल सुधार की संभावना कम दिखाई दे रही है।
दिल्ली के इलाकों में अलग-अलग स्तर पर प्रदूषण
यदि राजधानी के विभिन्न इलाकों की बात करें तो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े प्रदूषण की भयावह तस्वीर पेश करते हैं। दिल्ली के अलीपुर क्षेत्र में एक्यूआई 309 दर्ज किया गया है, जो खराब श्रेणी में है, जबकि आनंद विहार में यह आंकड़ा 425 तक पहुंच गया, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है। अशोक विहार में एक्यूआई 369, आया नगर में 338 और बवाना में 354 दर्ज किया गया है।
बुराड़ी में 316, चांदनी चौक में 408 और डीटीयू इलाके में 339 एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया है। द्वारका सेक्टर-8 में हालात और बिगड़ते हुए दिखाई दिए, जहां एक्यूआई 401 तक पहुंच गया। आईजीआई एयरपोर्ट टर्मिनल-3 क्षेत्र में 323, आईटीओ में 365 और जहांगीरपुरी में 386 एक्यूआई दर्ज किया गया है। इसके अलावा लोधी रोड में 336, मुंडका में 376, नजफगढ़ में 333, नरेला में 343 और पंजाबी बाग में 373 एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया। आरकेपुरम में यह स्तर 392, रोहिणी में 380, सोनिया विहार में 349, विवेक विहार में 414 और वजीरपुर में 383 तक पहुंच गया है। इन आंकड़ों से साफ है कि राजधानी का शायद ही कोई इलाका ऐसा बचा हो, जहां हवा सांस लेने लायक कही जा सके।
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मौसम की सुस्ती बनी प्रदूषण की बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, हवा की गति बेहद कम होने और दिशा में बार-बार बदलाव के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में ही फंसे हुए हैं। ठंडी रातें और सुबह के समय कोहरा भी प्रदूषण को और घना बना रहा है। वाहनों का धुआं, निर्माण गतिविधियां और आसपास के राज्यों से आने वाला धुआं मिलकर दिल्ली की हवा को और जहरीला बना रहे हैं। इन परिस्थितियों में प्रदूषण का स्तर तेजी से नीचे आने की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।
रविवार तक मिल सकती है आंशिक राहत
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्वानुमान के अनुसार, रविवार तक राजधानी की हवा बेहद खराब श्रेणी से फिसलकर फिर से खराब श्रेणी में पहुंच सकती है। इससे लोगों को प्रदूषण से कुछ हद तक फौरी राहत मिल सकती है, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लगेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक तेज हवाएं या बारिश जैसी मौसमी गतिविधियां नहीं होतीं, तब तक प्रदूषण का स्तर खतरनाक दायरे में बना रह सकता है।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
डॉक्टरों का कहना है कि 350 से ऊपर का एक्यूआई लंबे समय तक बने रहना स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है। ऐसे में लोगों को सुबह और देर शाम बाहर निकलने से बचना चाहिए, मास्क का उपयोग करना चाहिए और बच्चों व बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। राजधानी में रहने वाले लोग एक बार फिर साफ हवा की उम्मीद में मौसम के बदलने का इंतजार कर रहे हैं।

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