स्वामी विवेकानंद मॉडल सरकारी स्कूल ऊपनी गांव में दर्दनाक घटना, ग्रामीणों में आक्रोश
बीकानेर। राजस्थान के बीकानेर जिले में एक हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। स्कूल के पहले ही दिन चार साल के मासूम पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। कुत्तों ने बच्चे के सिर की चमड़ी नोच ली, कान काट लिया और शरीर के कई हिस्सों को बुरी तरह जख्मी कर दिया। यह घटना ऊपनी गांव स्थित स्वामी विवेकानंद मॉडल सरकारी स्कूल ऊपनी में मंगलवार को हुई।
घायल बच्चे का इलाज पीबीएम अस्पताल में जारी है। चिकित्सकों के अनुसार बच्चे की हालत गंभीर है और सिर की चमड़ी दोबारा लगाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी करनी पड़ेगी।
भाई के साथ पहली बार स्कूल गया था, डेढ़ घंटे बाद हुआ हादसा
ऊपनी गांव निवासी रामू, पिता रामप्रताप सिद्ध, मंगलवार को अपने बड़े भाई के साथ पहली बार स्कूल गया था। वह करीब डेढ़ घंटे तक कक्षा में बैठा रहा। इसके बाद वह ग्राउंड की ओर चला गया। इसी दौरान स्कूल का मुख्य द्वार खुला हुआ था, जिससे आवारा कुत्तों का झुंड परिसर में घुस आया।
कुत्तों ने मासूम को घेर लिया और उस पर हमला कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि कुत्तों के भौंकने और बच्चे की चीख की आवाज स्कूल स्टाफ तक नहीं पहुंच सकी। वहां से गुजर रहे एक ग्रामीण ने बच्चे की चीख सुनकर उसे कुत्तों के चंगुल से छुड़ाया। परिजन बदहवास हालत में बच्चे को तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे।
प्लास्टिक सर्जरी से ही संभव होगा उपचार, लंबा चलेगा इलाज
पीबीएम अस्पताल के ट्रॉमा इंचार्ज डॉ. एल.के. कपिल ने बताया कि बच्चे के सिर पर गंभीर चोट आई है। स्किन ग्राफ्टिंग के लिए प्लास्टिक सर्जरी करनी होगी। इससे पहले घाव को कई बार साफ किया जाएगा और संक्रमण की आशंका को नियंत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शरीर की प्रतिक्रिया के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी और उपचार लंबा चल सकता है।
पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. एम.एल. काजला ने बताया कि बच्चे का सामान्य स्वास्थ्य स्थिर है, लेकिन जहां-जहां कुत्तों ने नोचा है, वहां सर्जरी आवश्यक होगी। विशेष रूप से सिर की चमड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिसे केवल प्लास्टिक सर्जरी के माध्यम से ही ठीक किया जा सकता है। चिकित्सकों के अनुसार बच्चे को पूरी तरह स्वस्थ होने में लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है और इस दौरान कई बार सर्जरी करनी पड़ सकती है।
ग्रामीणों का विरोध, स्कूल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
घटना के बाद गांव में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मुख्य द्वार बंद क्यों नहीं किया गया और वहां गार्ड की तैनाती क्यों नहीं थी। सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि कक्षा से बाहर जाने के बाद बच्चे की निगरानी क्यों नहीं की गई।
ग्रामीणों का दावा है कि ये आवारा कुत्ते पहले भी पशुओं और एक अन्य बच्चे पर हमला कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। घटना के बाद ग्रामीणों ने स्कूल के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
प्रिंसिपल का पक्ष और प्रशासन को सूचना
स्कूल के प्रिंसिपल सुभाष मीणा ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि बच्चा वॉशरूम की ओर गया था और कुछ ही पलों में बाहर निकल गया। उन्होंने बताया कि स्कूल गेट के आसपास हिंसक कुत्तों की शिकायत पहले भी की गई थी।
घटना की सूचना उपखंड अधिकारी, पुलिस प्रशासन और मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को दे दी गई है। प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।
यह घटना न केवल एक परिवार के लिए असहनीय पीड़ा का कारण बनी है, बल्कि स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था और आवारा कुत्तों की समस्या पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। मासूम के इलाज के साथ-साथ अब पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और जिम्मेदारी को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
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