इंद्रावती नदी के पास चलाया गया संयुक्त अभियान, सर्च ऑपरेशन जारी

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के घने जंगलों में गुरुवार सुबह सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। यह कार्रवाई इंद्रावती नदी के किनारे स्थित जंगल क्षेत्र में की गई, जहां सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी। मुठभेड़ के दौरान दो नक्सली मारे गए, जबकि घटनास्थल से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, सुरक्षाबलों को क्षेत्र में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद विशेष रणनीति के तहत संयुक्त दल को रवाना किया गया। जंगल के भीतर पहुंचते ही नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाला। दोनों ओर से कुछ समय तक गोलीबारी जारी रही।

मारे गए नक्सलियों के पास से राइफलें और हथियार बरामद

मुठभेड़ शांत होने के बाद तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें वर्दी पहने दो नक्सलियों के शव बरामद किए गए। घटनास्थल से एक सेल्फ-लोडिंग राइफल, एक इंसास राइफल और एक 12 बोर बंदूक सहित अन्य सामग्री जब्त की गई। अधिकारियों का कहना है कि बरामद हथियारों से यह संकेत मिलता है कि मारे गए नक्सली किसी सक्रिय दस्ता का हिस्सा थे।

सुरक्षाबलों ने पूरे क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान जारी रखा है। आशंका है कि मुठभेड़ के दौरान कुछ अन्य नक्सली घायल होकर जंगल की ओर भाग निकले हों। इसलिए आसपास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। 

2 Maoists killed in encounter with security forces in Chhattisgarh's Bijapur;  search on for elusive leader Papa Rao | India News - The Indian Express

नक्सल उन्मूलन के लिए समयसीमा, इस वर्ष अब तक 25 माओवादी ढेर

केंद्र सरकार ने नक्सल समस्या को समाप्त करने के लिए इस वर्ष 31 मार्च तक की समयसीमा निर्धारित की है। गुरुवार की इस कार्रवाई के साथ ही वर्ष 2026 में अब तक राज्य में अलग-अलग मुठभेड़ों में कम से कम 25 माओवादी मारे जा चुके हैं।

इससे पहले 3 जनवरी को बस्तर क्षेत्र में दो अलग-अलग मुठभेड़ों में 14 माओवादी मारे गए थे। बस्तर क्षेत्र में बीजापुर सहित सात जिले शामिल हैं, जहां लंबे समय से नक्सली गतिविधियां सक्रिय रही हैं।

पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच विभिन्न अभियानों के दौरान कुल 285 माओवादी मारे गए थे। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों की तीव्रता लगातार बढ़ी है।

सुरक्षा रणनीति और क्षेत्रीय प्रभाव

बीजापुर और बस्तर का इलाका लंबे समय से नक्सली गतिविधियों का गढ़ माना जाता रहा है। घने जंगल, दुर्गम भौगोलिक स्थिति और सीमित संचार सुविधाएं सुरक्षाबलों के लिए चुनौतीपूर्ण रही हैं। हालांकि हाल के वर्षों में खुफिया तंत्र की मजबूती और संयुक्त अभियानों की रणनीति से सुरक्षाबलों को उल्लेखनीय सफलता मिली है।

अधिकारियों का कहना है कि लगातार चल रहे अभियानों से नक्सलियों की संगठनात्मक क्षमता कमजोर हुई है। हथियारों की बरामदगी से यह भी संकेत मिलता है कि क्षेत्र में अभी भी सक्रिय नेटवर्क मौजूद है, जिसे पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए अभियान जारी रहेगा।

फिलहाल इलाके में शांति है, लेकिन सुरक्षाबलों ने किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल तैनात कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन ने आसपास के गांवों में सतर्कता बढ़ाने और लोगों से सहयोग की अपील की है।

यह मुठभेड़ एक बार फिर संकेत देती है कि छत्तीसगढ़ के जंगलों में नक्सल विरोधी अभियान निर्णायक चरण में पहुंच रहे हैं। आने वाले दिनों में ऐसे अभियानों की तीव्रता और बढ़ सकती है।