भारतनेट संशोधित कार्यक्रम के तहत 13,426 ग्राम पंचायतें जुड़ेंगी, 5 लाख ग्रामीण घरों को फाइबर कनेक्शन का लक्ष्य
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश में ग्रामीण दूरसंचार ढांचे को सुदृढ़ और उन्नत करने के लिए राज्य सरकार के साथ महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस पहल के तहत 2,432 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे राज्य में इंटरनेट और ब्रॉडबैंड पहुंच को गांव-गांव तक विस्तारित किया जाएगा। यह समझौता भारतनेट संशोधित कार्यक्रम को तेज गति से लागू करने के उद्देश्य से किया गया है। समझौते पर केंद्र सरकार की इकाई डिजिटल भारत निधि और आंध्र प्रदेश सरकार के बीच हस्ताक्षर किए गए।
तडेपल्ले स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू , केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर उपस्थित रहे। डिजिटल भारत निधि के प्रशासक श्यामल मिश्रा और राज्य सरकार के विशेष मुख्य सचिव (बुनियादी ढांचा एवं निवेश) मोव्वा तिरुमाला कृष्णा बाबू ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
1.39 लाख करोड़ की राष्ट्रीय योजना का हिस्सा
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि संशोधित भारतनेट कार्यक्रम 1.39 लाख करोड़ रुपये की सार्वजनिक निधि से संचालित योजना है। इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक गांव तक फाइबर और ब्रॉडबैंड पहुंचाना है। उन्होंने इसे तकनीक का लोकतंत्रीकरण बताते हुए कहा कि डिजिटल पहुंच अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी समान अवसर सुनिश्चित करेगी।
राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर ने कहा कि यह समझौता ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा। इससे लोगों को सस्ती और भरोसेमंद डिजिटल सेवाएं मिलेंगी। मुख्यमंत्री नायडू ने इसे राज्य की डिजिटल रूपांतरण यात्रा में मील का पत्थर बताया और कहा कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और ई-शासन सेवाओं में व्यापक सुधार संभव होगा।
13,426 ग्राम पंचायतों को मिलेगा लाभ
भारतनेट संशोधित कार्यक्रम के तहत आंध्र प्रदेश में कुल 13,426 ग्राम पंचायतों को जोड़ा जाएगा। इसमें पहले चरण की 1,692 ग्राम पंचायतों का उन्नयन, दूसरे चरण की 11,254 ग्राम पंचायतों को शामिल करना और 480 नई ग्राम पंचायतों को जोड़ना शामिल है। इसके अतिरिक्त मांग आधारित मॉडल के तहत 3,942 गांवों को भी कनेक्टिविटी दी जाएगी।
इस परियोजना से राज्य के 5 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को फाइबर कनेक्शन मिलने की संभावना है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस तथा डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाएं सुलभ होंगी।
डिजिटल समावेशन की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गति इंटरनेट की उपलब्धता से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। छोटे व्यवसाय, स्टार्टअप और कृषि आधारित उद्यमों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार तक पहुंच मिलेगी। साथ ही युवाओं के लिए कौशल विकास और ऑनलाइन रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
केंद्र और राज्य के बीच हुआ यह समझौता डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस पहल के प्रभाव से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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