अमेरिकी विमानन प्राधिकरण के निर्देश के बाद बोइंग 787 बेड़े में तकनीकी संशोधन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सुरक्षा प्राथमिकता
नई दिल्ली। अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन के निर्देश के बाद एअर इंडिया ने अपने ड्रीमलाइनर विमानों में तकनीकी सुधार की प्रक्रिया तेज कर दी है। पानी के संभावित रिसाव से विमान के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पड़ने वाले असर को रोकने के लिए फौसेट कंट्रोल मॉड्यूल में आवश्यक संशोधन किए जा रहे हैं। यह कदम विमानन सुरक्षा मानकों को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन ने दो फरवरी को बोइंग 787-8, 787-9 और 787-10 विमानों के लिए एयरवर्दिनेस डायरेक्टिव जारी किया था। इन विमानों को ड्रीमलाइनर के नाम से जाना जाता है। इससे पहले जनवरी 2024 में भी इसी तरह का निर्देश जारी किया गया था, जिसमें फौसेट कंट्रोल मॉड्यूल से पानी के रिसाव की संभावना का उल्लेख किया गया था।
पानी के रिसाव से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर खतरा
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, फौसेट कंट्रोल मॉड्यूल में किसी भी प्रकार का रिसाव होने पर पानी विमान के संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक पहुंच सकता है। इससे कॉकपिट और अन्य नियंत्रण प्रणालियों की कार्यप्रणाली प्रभावित होने का जोखिम रहता है। हालांकि अब तक किसी बड़ी घटना की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियाती तौर पर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
एअर इंडिया के बेड़े में इस समय 33 बोइंग 787 विमान शामिल हैं, जिनमें 26 पुराने 787-8 विमान हैं। सूत्रों के मुताबिक, एयरलाइन ने अपने अधिकांश विमानों में आवश्यक संशोधन शुरू कर दिए हैं और आधे से अधिक विमानों में सुधार का कार्य पूरा भी कर लिया गया है। हालांकि, कितने विमानों में पूरी प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
चरणबद्ध तरीके से हो रहा संशोधन
तकनीकी सूत्रों का कहना है कि यह सुधार कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है, ताकि उड़ान संचालन पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। विमान रखरखाव केंद्रों में इंजीनियरिंग टीमों द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार मॉड्यूल में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं।
टाटा समूह के स्वामित्व वाली एअर इंडिया ने विमानन सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए नियामक निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। हालांकि कंपनी और बोइंग की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की गई है।
वैश्विक स्तर पर सतर्कता
बोइंग 787 श्रृंखला के विमान विश्वभर में लंबी दूरी की उड़ानों के लिए व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। ऐसे में अमेरिकी प्राधिकरण द्वारा जारी निर्देश का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखा जा रहा है। विभिन्न एयरलाइनों ने अपने-अपने बेड़े की तकनीकी समीक्षा शुरू कर दी है।
विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को लेकर कड़े नियम लागू होते हैं और किसी भी संभावित तकनीकी जोखिम को गंभीरता से लिया जाता है। एअर इंडिया द्वारा शुरू किया गया यह सुधार अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071157234z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-56.png)
/swadeshjyoti/media/agency_attachments/2025/11/09/2025-11-09t071151025z-logo-640-swadesh-jyoti-1-2025-11-09-12-41-50.png)
/swadeshjyoti/media/media_files/2026/03/02/air-india-2026-03-02-11-59-55.jpg)