मुंबई-दिल्ली में आसमानी आफ़त: मुंबई में भारी बारिश, दिल्ली में यमुना का जलस्तर खतरे से ऊपर
नई दिल्ली/मुंबई। देश के दो बड़े महानगर – मुंबई और दिल्ली – इस समय मानसून की मार झेल रहे हैं। मुंबई में लगातार तीसरे दिन तेज बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, वहीं दिल्ली में यमुना नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। दोनों ही शहरों की जल निकासी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मुंबई: जलभराव से थमी रफ्तार, स्कूल-कॉलेज बंद
मुंबई में पिछले 24 घंटों में 300 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई। शहर के कई हिस्सों में 2 से 4 फीट तक पानी भर गया। बिक्रोली में मंगलवार सुबह 8.30 बजे से बुधवार सुबह 8.30 बजे तक 255 मिमी बारिश हुई। हालात को देखते हुए लगातार तीसरे दिन स्कूल-कॉलेज और सरकारी दफ्तर बंद रखने का आदेश जारी किया गया।
- लोकल ट्रेनें प्रभावित: 34 ट्रेनें (17 जोड़ी) रद्द।
- हवाई यातायात बाधित: 250 से ज्यादा उड़ानें लेट या रद्द।
- अंधेरी सब-वे समेत कई सड़कें जलमग्न।
- बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक 7 मौतें और कई घायल।



मोनोरेल हादसा और रेस्क्यू
मैसूर कॉलोनी स्टेशन के पास एक मोनोरेल ट्रैक पर अटक गई, जिसमें 582 यात्री सवार थे। बिजली और एसी बंद हो जाने से घुटन की स्थिति बनी। एनडीआरएफ ने खिड़कियाँ तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला और 40–50 फीट ऊँचाई से क्रेन के जरिए सुरक्षित उतारा। इसके अलावा आचार्य अत्रे और वडाला स्टेशन से भी करीब 200 यात्रियों को निकाला गया।


दिल्ली: खतरे के निशान से ऊपर यमुना, कई बस्तियों में खतरा
दिल्ली में हथिनी कुंड बैराज से छोड़े गए 1.79–1.80 लाख क्यूसेक पानी के कारण यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। रविवार को छोड़ा गया पानी सोमवार आधी रात को दिल्ली पहुँचा और सोमवार को छोड़ा गया पानी मंगलवार शाम तक पहुँचने की संभावना है। प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है।
- यमुना का जलस्तर 206 मीटर से ऊपर जाने का अनुमान।
- गीता कॉलोनी, पूर्वी दिल्ली और अन्य निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा।
- पुलिस और DDMA टीमें झुग्गियों से लोगों को निकालने में जुटी।
- केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से 24×7 निगरानी।
- दिल्ली बोट क्लब में 24 नावें, गोताखोर और आपातकालीन दल तैनात।


साझा चुनौती: ढांचा और तैयारी सवालों के घेरे में
विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई हो या दिल्ली, समस्या केवल बारिश या पानी छोड़े जाने की नहीं है, बल्कि शहरी जलनिकासी और आपदा प्रबंधन की नाकामी है।
- मुंबई में वर्षों से स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज प्रोजेक्ट (BRIMSTOWAD) अधर में लटका है।
- दिल्ली में हर साल हथिनी कुंड से पानी छोड़े जाने के बाद भी ठोस दीर्घकालिक समाधान नहीं बन पाया।
जब तक इन शहरों में संरचनात्मक सुधार नहीं किए जाते, हर साल बारिश और बाढ़ से जनजीवन इसी तरह प्रभावित होता रहेगा।
✍️ स्वदेश ज्योति के द्वारा | और भी दिलचस्प खबरें आपके लिए… सिर्फ़ स्वदेश ज्योति पर!