79वें स्वतंत्रता दिवस पर मध्यप्रदेश में ध्वजारोहण, मुख्यमंत्री डॉ. यादव का लाल परेड मैदान से सशक्त संदेश
भोपाल। देशभर के साथ मध्यप्रदेश में भी 79वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। राजधानी भोपाल का ऐतिहासिक लाल परेड मैदान तिरंगे की तीन रंगों की आभा में नहाया हुआ था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यहाँ ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली और राज्य की जनता को संबोधित करते हुए न केवल सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं का ब्योरा दिया, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर भी स्पष्ट संदेश दिया।

“जो जैसा, उसे वैसा ही जवाब” — ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र
अपने संबोधन की शुरुआत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हाल ही में पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर किए गए ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा —
“हमारा सिद्धांत स्पष्ट है — जो जैसा करेगा, उसे वैसा ही जवाब मिलेगा।”
यह बयान राष्ट्रीय सुरक्षा पर राज्य सरकार के अडिग रुख को दर्शाता है।
राज्यभर में उत्सव की झलक
इंदौर में महापौर पुष्यमित्र भार्गव साइकिल से सिटी बस कार्यालय पहुँचे और ध्वजारोहण किया। रतलाम में विजय शाह ने झंडावंदन किया, जबकि उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा जबलपुर और राजेंद्र कुमार शुक्ल शहडोल में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
राज्य के 31 जिलों में मंत्रियों और 24 जिलों में कलेक्टरों ने ध्वजारोहण कर परेड की सलामी ली।
गुरुवार शाम को ही राजधानी सहित प्रदेश की ऐतिहासिक इमारतें रोशनी से जगमगा उठीं। विधानसभा भवन, खंडवा का इंदिरा सागर डैम और भोपाल का लाल परेड मैदान तिरंगे के रंगों में सजा, तो देखने वाले मंत्रमुग्ध रह गए।

मुख्यमंत्री के भाषण में विकास और कल्याणकारी योजनाओं का खाका
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाली दीपावली से लाड़ली बहनों को ₹1500 प्रतिमाह दिए जाएंगे। किसानों को बिजली बिल से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है और गोशालाओं को दी जाने वाली राशि में वृद्धि की जाएगी।
उन्होंने घोषणा की कि दो लाख से अधिक नई भर्तियाँ की जाएंगी।

सरकार की उपलब्धियाँ और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
- स्वामित्व योजना में मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर रहा।
- जल संचय में खंडवा जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
- ई-गवर्नेंस में प्रदेश को स्वर्ण पदक मिला।
- प्रशासनिक और न्यायिक कार्य अब पेपरलेस हो चुके हैं।
- कई जिलों में नए हवाई अड्डों का निर्माण हुआ।
- जबलपुर और ग्वालियर को मेट्रोपोलिटन शहर के रूप में विकसित किया जाएगा।
- 55 जिलों में पीएम श्री स्कूल खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई।
पर्यावरण और स्वदेशी पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब तक 5 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने जनता से स्वदेशी वस्तुओं के प्रचार-प्रसार का आग्रह किया, ताकि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार किया जा सके।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रोत्साहन और सुरक्षा
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देने की घोषणा की गई।
उन्होंने बताया कि कल ही पूरे प्रदेश में डायल 112 सेवा का शुभारंभ हुआ है, जिससे आपातकालीन सेवाएँ और तेज हो सकेंगी।
संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पचमढ़ी के जंगलों का नाम भभूत सिंह के नाम पर रखा जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि यूनेस्को ने भोजपुर को जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की है, जो सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में अहम कदम है।
सिंहस्थ 2028 की तैयारी
आगामी सिंहस्थ पर्व को देखते हुए शिप्रा नदी के जल को स्वच्छ करने और घाटों के निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है।
उन्होंने कहा कि इस महाकुंभ में 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के स्नान की व्यवस्था की जा रही है।
मध्यप्रदेश का आत्मविश्वास और भविष्य की दिशा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने भाषण का समापन इस संदेश के साथ किया कि मध्यप्रदेश आत्मनिर्भर भारत का सशक्त हिस्सा बनेगा।
उन्होंने कहा कि विकास, सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक संवर्धन के रास्ते पर राज्य निरंतर आगे बढ़ रहा है।
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