मानसून का कहर: राजस्थान, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में तबाही, 149 की मौत, 2282 करोड़ का नुकसान
राजस्थान, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में मानसून का कहर एक बार फिर से गहराता जा रहा है। भारी बारिश के कारण कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कहीं घर डूब गए हैं, तो कहीं सड़कों और स्कूलों को नुकसान पहुंचा है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में तो बारिश और भूस्खलन से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं।
राजस्थान: 4 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, सवाई माधोपुर में बाढ़ जैसे हालात
राजस्थान में मानसून दोबारा एक्टिव हो गया है। मौसम विभाग ने शुक्रवार को उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। सवाई माधोपुर जिले में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पल्ली पार इलाके में करीब 250 घर पानी में डूब गए, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा। कई इलाकों में पानी भर जाने से लोग घरों में ही कैद होकर रह गए हैं।

गुजरात: दूध का टैंकर बहा, 13 लोगों को बचाया गया
गुजरात के पोरबंदर जिले में भी तेज बारिश ने तबाही मचाई। माधवपुर घेड इलाके में भारी जलभराव हो गया। हालात इतने खराब रहे कि एक दूध से भरा टैंकर पानी के तेज बहाव में फंस गया। उसमें सवार 13 लोगों को NDRF की टीम ने समय रहते बचा लिया, नहीं तो बड़ी त्रासदी हो सकती थी। ग्रामीण इलाकों में पानी घुसने से खेतों को भी नुकसान पहुंचा है।

जम्मू-कश्मीर: पुंछ में भूस्खलन से स्कूल का हिस्सा टूटा
जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के मंडी सेक्टर में भारी बारिश के कारण भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हुआ। इस हादसे में एक स्कूल की इमारत का हिस्सा टूट गया, जिससे आसपास के लोग दहशत में आ गए। प्रशासन ने बच्चों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। बारिश की वजह से जम्मू-राजौरी और पुंछ के बीच की कई सड़कें भी अवरुद्ध हो गई हैं।

हिमाचल प्रदेश: भारी बारिश से 347 सड़कें बंद, करोड़ों का नुकसान
हिमाचल प्रदेश में मौसम विभाग ने 23 से 26 अगस्त तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। पहले से ही राज्य में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। भूस्खलन के कारण 347 सड़कें पूरी तरह बंद हैं। इसके अलावा, 281 ट्रांसफॉर्मर और 145 जलापूर्ति योजनाएं ठप हो चुकी हैं, जिससे लोगों को बिजली और पानी की भारी समस्या झेलनी पड़ रही है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, अब तक हिमाचल प्रदेश में 2282 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। बारिश और आपदाओं से अब तक 149 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 38 लोग अभी भी लापता हैं। प्रदेश में इस बार सामान्य से 17% ज्यादा बारिश दर्ज की गई है, जिससे पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन हो रहे हैं।

प्रशासन और लोगों के सामने बड़ी चुनौती
चार राज्यों में हालात को देखते हुए प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है। NDRF, SDRF और स्थानीय टीमें प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। वहीं, मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने प्रशासन की चिंताएं और बढ़ा दी हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में भी कई राज्यों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
इस मानसूनी तबाही ने साफ कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब और भी गंभीर होता जा रहा है। लगातार होने वाली बारिश और भूस्खलन न केवल जनहानि और आर्थिक नुकसान का कारण बन रहे हैं, बल्कि आम लोगों के जीवन को भी संकट में डाल रहे हैं।
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