मोहनलाल को मिला दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान

नई दिल्ली, 20 सितंबर।
भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड 2023 इस बार मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता, निर्माता और निर्देशक मोहनलाल को दिया जाएगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक घोषणा एक्स (पूर्व ट्विटर) पर की। यह फैसला दादासाहेब फाल्के पुरस्कार चयन समिति की सिफारिश पर लिया गया है।

मोहनलाल को यह पुरस्कार 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में 23 सितंबर 2025 को प्रदान किया जाएगा।


चार दशक से अधिक लंबा करियर

मोहनलाल ने अपने करियर की शुरुआत 1980 में फिल्म मंजिल विरिंजा पूक्कल से की थी। इसके बाद उन्होंने मलयालम सिनेमा ही नहीं, बल्कि तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा। अब तक वे 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं।

उनकी बहुमुखी प्रतिभा और अलग-अलग तरह की भूमिकाओं को निभाने की क्षमता ने उन्हें भारतीय सिनेमा का एक जीवंत अध्याय बना दिया है।


मलयालम सिनेमा से दूसरे कलाकार

मोहनलाल यह प्रतिष्ठित पुरस्कार पाने वाले दूसरे मलयालम कलाकार हैं। उनसे पहले मशहूर निर्देशक अदूर गोपालकृष्णन को वर्ष 2004 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पिछले वर्ष यह पुरस्कार बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को मिला था।

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प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर मोहनलाल को बधाई देते हुए लिखा :
“मोहनलाल उत्कृष्टता और बहुमुखी प्रतिभा के प्रतीक हैं। दशकों तक उन्होंने मलयालम सिनेमा और रंगमंच को नई दिशा दी है। उन्होंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी फिल्मों में भी बेहतरीन काम किया है। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।”


मोहनलाल की प्रतिक्रिया

पुरस्कार की घोषणा पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मोहनलाल ने कहा :
“यह मेरे लिए गर्व और भावुक करने वाला क्षण है। मैं अपने दर्शकों, निर्देशकों और लेखकों का आभारी हूं, जिन्होंने हमेशा मुझ पर भरोसा किया। यह सम्मान केवल मेरा नहीं बल्कि पूरी मलयालम फिल्म इंडस्ट्री का है।”


प्रेरणा का स्रोत बनी उनकी यात्रा

मोहनलाल की सिनेमाई यात्रा केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने नाटकों और मंचीय प्रस्तुतियों में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनकी अभिनय शैली और समर्पण ने भारतीय सिनेमा में अमिट छाप छोड़ी है।

आलोचक मानते हैं कि दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होना उनके चार दशक से भी अधिक लंबे करियर का सच्चा सम्मान है।