माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय में अभ्युदय–2025 की शुरुआत, मुख्यमंत्री बोले– हनुमान थे पहले खोजी पत्रकार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले– रामायण काल में पत्रकार की भूमिका निभा चुके थे हनुमान, माखनलाल चतुर्वेदी ने हिंदी को दिया सम्मान
भोपाल। राजधानी भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में बुधवार को नए शैक्षणिक सत्र अभ्युदय–2025 का शुभारंभ हुआ। यह अवसर न केवल नए विद्यार्थियों के लिए बल्कि पूरे पत्रकारिता जगत के लिए प्रेरणादायी रहा। कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, वहीं प्रख्यात कवि और रामकथा मर्मज्ञ डॉ. कुमार विश्वास ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय परिसर में माखनलाल चतुर्वेदी की प्रतिमा के अनावरण और नवागत विद्यार्थियों के स्वागत सत्र से हुई।


पत्रकारिता का इतिहास और हनुमान की मिसाल
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पत्रकारिता की जड़ों को भारतीय परंपरा और संस्कृति से जोड़ते हुए कहा कि खोजी पत्रकारिता की भूमिका सबसे पहले रामायण काल में दिखाई देती है। माता सीता की खोज के लिए जिस प्रकार हनुमान जी ने दूर–दूर तक जाकर सूचनाएं एकत्र कीं, वह आज की खोजी पत्रकारिता का ही स्वरूप था। उन्होंने कहा कि पत्रकार आज भी सच की खोज के लिए अपनी जान हथेली पर रखकर कार्य करता है। उन्होंने भगवान कृष्ण के समय नारद मुनि की भूमिका को भी पत्रकारिता से जोड़ा और कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य हमेशा समाज को सही जानकारी देना और जनजागरण करना रहा है।

हिंदी भाषा के उत्थान में माखनलाल चतुर्वेदी का योगदान
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में हिंदी भाषा के महत्व और उसके विकास में माखनलाल चतुर्वेदी के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी ने पत्रकारिता और हिंदी दोनों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। हिंदी को प्रतिष्ठा दिलाने के लिए उन्होंने इसे देवपुत्र की यात्रा बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी का इतिहास बहुत पुराना नहीं है, लेकिन इसे स्थापित करने में माखनलाल जैसे पत्रकारों और कवियों ने जो योगदान दिया, उस पर पूरे प्रदेश को गर्व होना चाहिए।
LIVE: माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित सत्रारंभ समारोह 'अभ्युदय-2025' https://t.co/HCvcoqcddp
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) August 20, 2025
‘कुलपति’ से ‘कुलगुरु’ तक की यात्रा
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय में कुलपति और उपकुलपति की जगह कुलगुरु और उपकुलगुरु शब्दों के प्रयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परंपरा महाराष्ट्र से प्रेरित है। उन्होंने एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वे इंदौर में शिक्षा मंत्री थे, तब एक शिक्षक ने उनसे मुलाकात कर अपना परिचय “कुलपति का पति” बताकर कराया। तब उन्होंने इस संबोधन को बदलने का विचार किया और महाराष्ट्र की परंपरा को अपनाते हुए ‘कुलगुरु’ शब्द का प्रयोग करने का निर्णय लिया।

समाज और परंपराओं से जुड़ाव की आवश्यकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सरकार हर त्यौहार और परंपरा को समाज के साथ मिलकर मनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने दशहरे का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले केवल कागज जलाकर परंपरा निभाई जाती थी, लेकिन अब शस्त्र पूजन की परंपरा को पुनर्जीवित किया गया है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

कुमार विश्वास का संबोधन: पत्रकारिता में एक दशक के बदलाव
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले एक दशक में गहरे बदलाव आए हैं। उन्होंने कहा कि पहले के संपादकीय पढ़कर समाज दिशा तय करता था, लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है। संपादकीय अब अक्सर किसी सेठ या संस्थान के दबाव में लिखे जाते हैं। इसके बावजूद पत्रकारिता का महत्व कम नहीं हुआ है, क्योंकि लिखे और छपे हुए शब्द अब भी समाज में सत्य के प्रतीक माने जाते हैं।
उन्होंने कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी की लिखी पुस्तक का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे इस पुस्तक ने उन्हें विश्वविद्यालय से जोड़ने का माध्यम बनाया। कुमार विश्वास ने छात्रों से कहा कि यहां से निकलने के बाद वे चाहे एंकर बनें, संवाददाता या संपादक, उनकी असली पहचान उनके सत्य और साहस में होगी।
पर्यावरण और स्वास्थ्य के संदेश के साथ कार्यक्रम
अभ्युदय–2025 कार्यक्रम के तहत पोषण अभियान का भी समापन किया गया। इसके अंतर्गत 1111 पौधे लगाए गए, जिससे पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश समाज तक पहुंचाया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि पत्रकारिता केवल सूचनाओं के आदान–प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का भी माध्यम है।

तीन दिवसीय कार्यक्रम 22 अगस्त तक
अभ्युदय–2025 कार्यक्रम तीन दिनों तक चलेगा। इस दौरान विभिन्न संगोष्ठियों, व्याख्यानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। उद्देश्य है कि नए विद्यार्थियों को पत्रकारिता की मूलभूत समझ, उसकी चुनौतियों और उसकी सामाजिक जिम्मेदारी से परिचित कराया जा सके।
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