इंदौर में फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया से बिगड़े हालात, 150 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती
इंदौर। देश के सबसे साफ शहरों में गिने जाने वाले इंदौर में इन दिनों पानी जानलेवा बनता जा रहा है। दूषित पानी पीने से जहां कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं बड़ी संख्या में लोग अब भी अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। पहले नर्मदा जल में गंदगी और मल-मूत्र की पुष्टि ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई थी, अब बोरिंग के पानी में भी खतरनाक बैक्टीरिया मिलने से हालात और गंभीर हो गए हैं।
नगर निगम द्वारा कराई गई जांच में सामने आया है कि बोरिंग के पानी के 69 सैंपलों में से 35 सैंपल फेल हो गए हैं। इन सैंपलों में फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई है, जो हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। यह खुलासा होते ही शहर में हड़कंप मच गया है।
कलेक्टर ने की पुष्टि, लैब रिपोर्ट से खुलासा
इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि बोरिंग के पानी के कुल 69 सैंपल लिए गए थे, जिनकी जांच नगर निगम की मूसाखेड़ी स्थित प्रयोगशाला में कराई गई। जांच में 35 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे और उनमें फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया पाया गया। प्रशासन ने इसे गंभीर स्वास्थ्य संकट मानते हुए निगरानी और जांच तेज कर दी है।
कैसे पानी में पहुंच रहा है बैक्टीरिया
विशेषज्ञों के अनुसार, फीकल कोलिफार्म बैक्टीरिया आमतौर पर सीवेज ओवरफ्लो, अनुपचारित सीवेज डिस्चार्ज या खराब सेप्टिक टैंकों के कारण पानी में प्रवेश करता है। आशंका जताई जा रही है कि कई इलाकों में ड्रेनेज चैंबरों से सीवेज का रिसाव हो रहा है, जिससे मल बैक्टीरिया युक्त पानी जमीन के भीतर जाकर बोरिंग के जलस्रोतों को भी दूषित कर रहा है। यही वजह है कि अब केवल सप्लाई लाइन ही नहीं, बल्कि बोरिंग का पानी भी असुरक्षित हो गया है।
भागीरथीपुरा में सबसे ज्यादा असर
शहर के भागीरथीपुरा इलाके में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां करीब 600 से अधिक बोरिंग हैं, जिनके पानी पर बड़ी आबादी निर्भर है। दूषित पानी पीने के कारण बड़ी संख्या में लोग उल्टी, दस्त, बुखार और पेट दर्द जैसी समस्याओं से पीड़ित हो रहे हैं। अब तक 150 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से करीब 20 मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है।
प्रशासन की चुनौती, लोगों में डर
पानी के सैंपल फेल होने की खबर के बाद लोगों में डर का माहौल है। कई इलाकों में लोग बोरिंग का पानी इस्तेमाल करने से कतरा रहे हैं, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण मजबूरी में उसी पानी पर निर्भर हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दूषित जलस्रोतों की पहचान कर उन्हें तुरंत बंद किया जाए और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था की जाए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करें और किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। प्रशासन का कहना है कि आगे भी सैंपलिंग और जांच जारी रहेगी, ताकि हालात पर काबू पाया जा सके।
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