साल 2047 तक मध्यप्रदेश को मिलेगी भरपूर बिजली, ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी
कांग्रेस की गलत नीतियों से अंधकार में था प्रदेश, 2047 तक सरप्लस बिजली देगा मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री
भोपाल। राजधानी भोपाल के रवीन्द्र भवन में मंगलवार को आयोजित विद्युत कंपनियों के कार्मिकों को नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस की गलत नीतियों के चलते कभी प्रदेश अंधकार में डूबा हुआ था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। हमारी सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में जो कदम उठाए हैं, उससे न केवल हर घर रोशन है बल्कि आने वाले वर्षों तक बिजली की कोई कमी नहीं होगी।

ऊर्जा का महत्व और सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जैसे जल और वायु हमारे जीवन के लिए आवश्यक हैं, वैसे ही आज के समय में ऊर्जा का महत्व भी उतना ही है। उन्होंने कहा कि “ऊर्जा जीवन की आधारशिला है। पंचतत्व में अग्नि तत्व उसी ऊर्जा का प्रतीक है और सूर्य देव इस ऊर्जा के सबसे बड़े दाता हैं।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनका मंत्रिमंडल देश के लिए उतना ही विराट स्वरूप लेकर आया है जितना विक्रमादित्य की 32 पुतलियों की गाथा। पड़ोसी देशों तक को यह कहने पर मजबूर होना पड़ता है कि काश मोदी उनके देश के भी प्रधानमंत्री होते।
LIVE: रवीन्द्र भवन, भोपाल में आयोजित विद्युत कंपनियों के नवनियुक्त कार्मिकों को नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम https://t.co/UDVes8yAFd
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) August 26, 2025
1060 पदों पर नियुक्ति पत्र वितरित
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की छह विद्युत कंपनियों के लिए 1060 पदों पर नियुक्ति पत्र बांटे गए हैं। अब बिजली कंपनी में कर्मचारियों की संख्या 51 हजार तक पहुंच चुकी है, जो कि बेहद प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि 2003 से ही भाजपा सरकार बिजली के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रही है और इसका परिणाम आज सबके सामने है।

कांग्रेस पर तीखा हमला
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की नीतियों पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस की गलतियों ने प्रदेश को गर्त में पहुंचा दिया था। “एक दौर ऐसा था जब शाम को छह बजे बाद पूरे प्रदेश में अंधकार छा जाता था। हर गली, हर मोहल्ले में लोग हाहाकार मचाए रहते थे। बिजली संकट के चलते घर-घर निराशा का माहौल था।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के प्रयासों से आज मध्यप्रदेश घर-घर में रोशन है और यहां उत्पादित बिजली दिल्ली की मेट्रो तक को ऊर्जा प्रदान कर रही है।

2047 तक बिजली का सरप्लस उत्पादन
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य साल 2047 तक मध्यप्रदेश को सरप्लस बिजली वाला राज्य बनाने का है। “हम थर्मल, सौर, पवन और जल ऊर्जा से उत्पादन कर रहे हैं। आज ही चार हजार मेगावाट के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। अब प्रदेश में किसी भी क्षेत्र को बिजली की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।”

किसानों और उपभोक्ताओं को बड़ा लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के 35 लाख किसानों को 18,500 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही एक करोड़ उपभोक्ताओं को 6 हजार करोड़ की सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि “बीच में छह-छह महीने तक कोयले का भुगतान तक नहीं हो पाता था, लेकिन हमने इस व्यवस्था को सुधार दिया है। साफ नीति और स्पष्ट नियत के साथ हम लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं।”
ग्रीन एनर्जी और आत्मनिर्भरता की ओर
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में तेजी से अग्रसर है। पीएम सूर्य योजना और रुफ टॉप योजना को लागू किया जा रहा है। सांची को पहले ही सोलर सिटी घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा जल शक्ति विभाग गांव-गांव तक पानी पहुंचाने के लिए सोलर पैनल्स का इस्तेमाल कर रहा है।
उन्होंने कहा कि “प्रदेश में आने वाले समय में बीस गुना तक बिजली उत्पादन बढ़ाया जाएगा। बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स आ रहे हैं। हम आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा चुके हैं। अब बिजली विभाग वितरण पर ध्यान देगा और उत्पादन के क्षेत्र में किसान व विभाग दोनों आत्मनिर्भर बनेंगे।”

21वीं सदी का आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि 21वीं सदी का भारत आत्मनिर्भरता की राह पर है और मध्यप्रदेश इसमें अग्रणी भूमिका निभाने को पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि “प्रदेश के हर गांव, हर घर और हर उद्योग तक बिजली पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है और आने वाले वर्षों में हम इस संकल्प को पूरा करेंगे।”
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