कुलगाम मुठभेड़: 9वें दिन भी ऑपरेशन जारी, 2 जवान शहीद, 9 घायल, आतंकियों के छिपे होने की आशंका
कुलगाम (जम्मू-कश्मीर)। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के अखल जंगल में 1 अगस्त से चल रहा ऑपरेशन शनिवार को नौवें दिन भी जारी है। शुक्रवार को हुई मुठभेड़ में घायल हुए चार जवानों में से दो की शनिवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। शहीद जवानों की पहचान लांस नायक प्रितपाल सिंह और सिपाही हरमिंदर सिंह के रूप में हुई है। इस ऑपरेशन में अब तक कुल नौ जवान घायल हुए हैं, जिनमें दो ने वीरगति प्राप्त की।

2 अगस्त को मारे गए थे दो आतंकी
ऑपरेशन के दूसरे दिन यानी 2 अगस्त को सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया था। इनमें से एक की पहचान पुलवामा निवासी हारिस नजीर डार के रूप में हुई, जो सी-कैटेगरी का आतंकी था। वह उन 14 स्थानीय आतंकियों की सूची में शामिल था, जिनके नाम खुफिया एजेंसियों ने 26 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद सार्वजनिक किए थे। हारिस के पास से एके-47 राइफल, मैगजीन और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया था।
सुरक्षाबलों की संयुक्त कार्रवाई
इस अभियान को जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) संयुक्त रूप से अंजाम दे रहे हैं। सुरक्षाबलों को आशंका है कि जंगल के अंदर अभी और आतंकी छिपे हो सकते हैं, जिसके चलते सर्च ऑपरेशन और फायरिंग लगातार जारी है।

आतंकियों के नेटवर्क पर करारा वार
9 अगस्त को सुरक्षाबलों ने किश्तवाड़ में भी पाकिस्तान में बैठे आतंकी गुर्गों के नेटवर्क पर करारा वार किया। कई ठिकानों पर छापेमारी कर सबूत जुटाए गए, जिनका इस्तेमाल आगे की कार्रवाई में किया जाएगा। यह ऑपरेशन न केवल कुलगाम के जंगल तक सीमित है, बल्कि घाटी में फैले आतंकी तंत्र को तोड़ने के व्यापक अभियान का हिस्सा है।
आतंकियों के छिपने की रणनीति
अखल जंगल का इलाका घने पेड़ों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और प्राकृतिक गुफाओं से भरा हुआ है, जो आतंकियों के लिए सुरक्षित ठिकाने की तरह काम करता है। सुरक्षाबलों के लिए ऐसे इलाकों में अभियान चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि दृश्यता कम और घेराबंदी के लिए समय ज्यादा लगता है। यही वजह है कि यह मुठभेड़ नौवें दिन भी जारी है।
शहीदों को श्रद्धांजलि और जनता की प्रतिक्रिया
शहीद हुए जवानों के बलिदान को लेकर पूरे देश में शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ देशभर में लोग सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से जवानों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। वहीं, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के लंबे अभियानों में सुरक्षाबलों का संयम और रणनीति ही उनकी सबसे बड़ी ताकत होती है।
ऑपरेशन का महत्व
यह ऑपरेशन न केवल सक्रिय आतंकियों के सफाए के लिए अहम है, बल्कि घाटी में उनके सप्लाई नेटवर्क और समर्थन तंत्र को खत्म करने में भी निर्णायक साबित होगा। सुरक्षाबलों का मानना है कि इस ऑपरेशन के सफल होने से दक्षिण कश्मीर में आतंकियों की गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ेगा।
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