रूस में 600 साल बाद क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी फटा, रिंग ऑफ फायर में बढ़ा खतरा
रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र कामचटका प्रायद्वीप में स्थित क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी में करीब 600 वर्षों के बाद पहली बार विस्फोट हुआ है। यह विस्फोट 2 अगस्त को हुआ, जिसकी जानकारी कामचटका के इमरजेंसी मंत्रालय ने रविवार को दी। विस्फोट के साथ ज्वालामुखी से करीब 6 हजार मीटर (20,000 फीट) की ऊंचाई तक राख का गुबार उठा, जिससे आसपास के हवाई क्षेत्र को पूरी तरह बंद करना पड़ा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह विस्फोट 4 दिन पहले आए 8.8 तीव्रता के भूकंप से जुड़ा हो सकता है।

600 साल से निष्क्रिय था क्रशेनिनिकोव, अब बन गया खतरा
क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी की ऊंचाई 1,856 मीटर है और यह कामचटका क्षेत्र के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित है। वैज्ञानिक मानते थे कि यह ज्वालामुखी लगभग निष्क्रिय हो चुका है, क्योंकि इसका कोई दर्ज इतिहास में विस्फोट रिकॉर्ड नहीं था। परंतु अब अचानक हुए इस सक्रियता ने वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।
इस विस्फोट से निकलने वाला राख का गुबार 6 हजार मीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया, जिससे न केवल क्षेत्रीय हवाई यातायात ठप हो गया, बल्कि आसपास के इलाकों में वातावरणीय प्रदूषण और सांस संबंधी बीमारियों की आशंका भी बढ़ गई है।

भूकंप के झटकों से ज्वालामुखी विस्फोट का संबंध?
कामचटका क्षेत्र में हाल ही में 8.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसे दुनिया का छठा सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जा रहा है। भूगर्भ वैज्ञानिकों का कहना है कि इस शक्तिशाली भूकंप ने ज्वालामुखीय प्लेटों पर गहरा प्रभाव डाला है, जिससे क्रशेनिनिकोव जैसे लंबे समय से निष्क्रिय ज्वालामुखी भी सक्रिय हो सकते हैं।
इससे पहले, जुलाई महीने में भी कामचटका के पास समुद्री क्षेत्र में 6 शक्तिशाली भूकंप आए थे, जिनमें से एक की तीव्रता 7.4 मापी गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोटों का सीधा संबंध प्लेट टेक्टोनिक्स से है, और यह क्षेत्र इस समय अत्यधिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है।

रिंग ऑफ फायर: ज्वालामुखियों और भूकंपों का गढ़
क्रशेनिनिकोव और सोपका जैसे ज्वालामुखी ‘रिंग ऑफ फायर’ नामक वैश्विक भौगोलिक क्षेत्र में स्थित हैं। यह क्षेत्र 40 हजार किलोमीटर में फैला है और इसमें 15 देश आते हैं। यह क्षेत्र विश्व के 90% भूकंपों और 75% सक्रिय ज्वालामुखियों का केंद्र है।
रिंग ऑफ फायर प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला हुआ है, जिसमें जापान, रूस, फिलिपींस, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका, कनाडा, चिली, पेरू जैसे देश शामिल हैं। यहां कॉन्टिनेंटल और ओशियनिक प्लेट्स के टकराव से भूगर्भीय घटनाएं बहुत आम हैं।

क्ल्यूचेव्स्काया सोपका भी हुआ सक्रिय
क्रशेनिनिकोव से पहले 31 जुलाई को कामचटका क्षेत्र का ही क्ल्यूचेव्स्काया सोपका ज्वालामुखी भी फट चुका है। यह ज्वालामुखी एशिया और यूरोप का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी माना जाता है। लगातार हो रहे इन विस्फोटों ने वैज्ञानिकों और स्थानीय प्रशासन की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

1952 में भी आया था भयानक भूकंप
यह पहला मौका नहीं है जब कामचटका क्षेत्र में इतनी बड़ी भूगर्भीय हलचल देखी गई हो। 4 नवंबर 1952 को यहां 9.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जिससे 9.1 मीटर ऊंची सुनामी लहरें उठीं थीं। हालांकि, उस समय जानमाल की बड़ी क्षति नहीं हुई थी, लेकिन अब के हालात कहीं अधिक जटिल और खतरनाक माने जा रहे हैं।
जापान और अमेरिका ने जारी की थी चेतावनी
2 अगस्त को आए भूकंप के बाद जापान, अमेरिका और चिली समेत कई देशों ने सुनामी की चेतावनियां जारी की थीं। जापान ने तो अपने फुकुशिमा परमाणु संयंत्र को खाली करवा दिया और टोक्यो में करीब 20 लाख लोगों को घर छोड़ने का आदेश दिया गया।
पृथ्वी की गहराई से उठता खतरा
क्रशेनिनिकोव ज्वालामुखी का 600 साल बाद सक्रिय होना इस बात का संकेत है कि पृथ्वी की भीतरी परतों में बहुत कुछ बदल रहा है। रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में भूगर्भीय हलचलों की यह बढ़ती तीव्रता न केवल पर्यावरण और जनजीवन के लिए खतरा बन रही है, बल्कि आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर जलवायु और भूगर्भीय आपदाओं के जोखिम को भी बढ़ा सकती है।
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