किश्तवाड़ बादल फटना: महिला का शव बरामद, मृतकों की संख्या 64 पहुँची, बचाव कार्य जारी
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चिशोती गांव में बादल फटने के बाद मचे कहर ने पूरे इलाके को दहला दिया है। इस प्राकृतिक आपदा के छठे दिन मंगलवार को एक और महिला का शव मलबे से निकाला गया। इसके साथ ही इस त्रासदी में मृतकों की संख्या बढ़कर 64 हो गई है। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है, लेकिन अभी भी कई लोग लापता हैं, जिन्हें खोजने की कोशिशें युद्धस्तर पर चल रही हैं।
महिला का शव बरामद, मलबे में मिली लाशें
अधिकारियों ने बताया कि सुबह बचाव दल को मलबे में से सड़ी-गली हालत में महिला का शव मिला। वहीं, खोजी कुत्तों की मदद से एक ढहे हुए घर के मलबे के नीचे से एक और शव का हिस्सा बरामद हुआ। हालांकि यह आशंका जताई जा रही है कि यह उसी शव का हिस्सा हो सकता है, जिसे पहले दिन बरामद किया गया था।

बचाव अभियान में जुटी टीमें
इस हादसे के बाद से पुलिस, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सीआईएसएफ, बीआरओ और स्थानीय स्वयंसेवक मिलकर बचाव कार्य में लगे हैं। अब तक 167 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि लापता लोगों की संख्या संशोधित सूची में घटकर 39 रह गई है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्र काफी बड़ा है, इस वजह से राहत कार्य में समय लग रहा है।
एसडीआरएफ के डीएसपी मसूफ अहमद मिर्जा ने बताया कि राहत अभियान तेज किया गया है और अब टीमें ऊपरी इलाकों के बाद निचले क्षेत्रों में भी तलाशी अभियान चला रही हैं।

सेना का बड़ा योगदान
जम्मू स्थित सेना की व्हाइट नाइट कोर ने पांच राहत टुकड़ियों को मौके पर तैनात किया है। सेना के इंजीनियरों ने रविवार को चिशोती नाले पर एक अस्थायी बेली ब्रिज का निर्माण किया, जिससे मचैल माता मंदिर जाने के लिए संपर्क बहाल हो गया। इसके अलावा, सेना ने ऑल-टेरेन वाहन और अतिरिक्त चिकित्सा दल भी राहत कार्य में लगाए हैं।

भारी उपकरण और डॉग स्क्वॉड की मदद
बचाव कार्य को तेजी देने के लिए एक दर्जन से अधिक अर्थ-मूवर और अन्य भारी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। एनडीआरएफ की डॉग स्क्वॉड भी मलबे में दबे लोगों को खोजने में मदद कर रही है। पिछले तीन दिनों में बचावकर्मियों ने कई बार नियंत्रित विस्फोट करके बड़े-बड़े पत्थरों को हटाया है, ताकि तलाशी अभियान सुचारू रूप से चल सके।
मृतकों में सुरक्षा बलों के जवान भी
इस भयावह आपदा में अब तक मारे गए 64 लोगों में तीन सीआईएसएफ कर्मी और जम्मू-कश्मीर पुलिस का एक विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) भी शामिल है। यह बताता है कि बादल फटने की तबाही का असर कितना व्यापक और विनाशकारी था।
प्रभावित गांव का हाल
चिशोती गांव, जो मचैल माता मंदिर की यात्रा से पहले का आखिरी पड़ाव माना जाता है, पूरी तरह तबाही की चपेट में है। लंगर (सामुदायिक रसोई) स्थल और कई घर पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रातोंरात पूरा इलाका तबाह हो गया और लोग अपने परिजनों को ढूंढने में अब भी भटक रहे हैं।

आपदा का बड़ा दायरा
अधिकारियों का मानना है कि इस बार बादल फटने का दायरा बेहद बड़ा रहा, जिसकी वजह से मलबा और पानी दोनों ने गांव को बुरी तरह प्रभावित किया। कई लोग अब भी अपने परिजनों के लापता होने से सदमे में हैं। वहीं, प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि राहत कार्य तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता।
स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों की भूमिका
इस आपदा में स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। प्रशासन और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर वे लगातार प्रभावित परिवारों की मदद कर रहे हैं। कई परिवारों को अस्थायी शिविरों में शिफ्ट किया गया है, जबकि घायलों का इलाज सेना और प्रशासन द्वारा लगाए गए अस्थायी चिकित्सा शिविरों में किया जा रहा है।
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