: केदारनाथ ध्यान गुफा का संचालन अब बीकेटीसी के पास, जीएमवीएन ने दी अनापत्ति
देहरादून। केदारनाथ धाम की प्रसिद्ध ध्यान गुफा, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2019 के ध्यान प्रवास के बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, अब बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अधीन होगी। अब तक इस गुफा का संचालन और प्रबंधन गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के हाथों में था। लेकिन शासन स्तर पर निर्णय के बाद जीएमवीएन ने इसे बीकेटीसी को हस्तांतरित करने के लिए अनापत्ति (NOC) दे दी है।

जीएमवीएन ने दी अनापत्ति, बीकेटीसी करेगा संचालन
बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने पुष्टि की कि शासन के निर्देशों के क्रम में ध्यान गुफा का हस्तांतरण अब बीकेटीसी को किया जा रहा है। जीएमवीएन ने 29 अगस्त को औपचारिक तौर पर बीकेटीसी को संचालन की अनुमति दे दी। इसके बाद उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने भी बीकेटीसी को सूचित कर दिया है।
गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के महाप्रबंधक (पर्यटन) ने कहा कि उन्हें ध्यान गुफा के संचालन को बीकेटीसी को सौंपे जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। अब यह प्रक्रिया शीघ्र ही पूरी कर ली जाएगी।

पर्यटकों का बढ़ रहा आकर्षण
गुफा की लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि सितंबर 2025 से अक्टूबर 2025 तक 15 पर्यटक पहले ही ध्यान गुफा में साधना और ठहरने का अग्रिम आरक्षण करा चुके हैं। जीएमवीएन ने स्पष्ट किया है कि ये आरक्षण पहले की तरह ही मान्य रहेंगे और पर्यटकों को किसी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
प्रधानमंत्री मोदी के ध्यान से मिली पहचान
केदारनाथ मंदिर से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित यह गुफा पहले एक प्राकृतिक गुफा थी। 2018 में पर्यटन विभाग ने इसे नया स्वरूप देकर ‘रूद्र ध्यान गुफा’ नाम दिया। लेकिन मई 2019 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ यात्रा के दौरान इस गुफा में ध्यान और साधना की, तब यह राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गई। इसके बाद से गुफा देश-विदेश के श्रद्धालुओं और योग-साधना में रुचि रखने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई।
आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा
ध्यान गुफा का संचालन अब बीकेटीसी के पास जाने से यहां की आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों के और अधिक व्यवस्थित होने की संभावना है। बीकेटीसी पहले से ही केदारनाथ और बदरीनाथ धाम का प्रबंधन करता है, ऐसे में गुफा के संचालन में भी धार्मिक परंपरा और अनुशासन का और गहरा समावेश होगा।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि ध्यान गुफा के हस्तांतरण से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधाएं बेहतर होंगी, बल्कि उत्तराखंड में आध्यात्मिक पर्यटन को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।
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