कर्नाटक धर्मस्थल केस में नया मोड़: शिकायतकर्ता गिरफ्तार, एसआईटी ने बयान में बताई गड़बड़ी
एसआईटी का दावा- बयान और दस्तावेज़ों में गड़बड़ी; पूर्व सफाईकर्मी ने लगाए थे शवों को जलाने और दफनाने के आरोप
मंगलुरु। कर्नाटक के चर्चित धर्मस्थल शव दफनाने मामले में शनिवार को बड़ा मोड़ आ गया। जिस व्यक्ति ने इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी, उसी को राज्य सरकार की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी उस वक्त हुई, जब अधिकारियों ने शिकायतकर्ता के बयानों और दस्तावेज़ों में गंभीर विसंगतियां पाई।

शिकायतकर्ता कौन है?
गिरफ्तार किया गया व्यक्ति धर्मस्थल मंदिर का पूर्व सफाईकर्मी बताया जा रहा है। उसका दावा है कि उसने 1995 से 2014 तक मंदिर परिसर में काम किया। इसी दौरान उसे कथित रूप से कई शवों को जलाने और दफनाने के लिए मजबूर किया गया। सफाईकर्मी ने गंभीर आरोप लगाए थे कि इन शवों में महिलाओं और नाबालिगों के शव भी शामिल थे, जिन पर यौन उत्पीड़न के निशान मौजूद थे।
क्या थे आरोप?
जुलाई में दर्ज की गई शिकायत में उसने आरोप लगाया था कि पिछले दो दशकों में धर्मस्थल क्षेत्र में कई हत्याएं, बलात्कार और शवों को छिपाने की घटनाएं हुईं। उसने यह भी कहा था कि यह सब मंदिर प्रबंधन के दबाव में होता रहा। इन आरोपों ने पूरे कर्नाटक में सनसनी फैला दी थी।

जांच और खुदाई
शिकायत मिलने के बाद 19 जुलाई को राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। टीम ने शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर धर्मस्थल क्षेत्र की 13 जगहों पर खुदाई कराई। खुदाई में एक कंकाल और इंसानी हड्डियां मिलने की पुष्टि भी हुई थी, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।
गिरफ्तारी क्यों हुई?
एसआईटी चीफ प्रणब मोहंती ने शुक्रवार देर रात तक शिकायतकर्ता से पूछताछ की। अधिकारियों का कहना है कि उसके बयानों और प्रस्तुत दस्तावेजों में कई विरोधाभास पाए गए। इसी आधार पर शनिवार सुबह उसे गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उस पर झूठा आरोप लगाने का केस दर्ज किया गया है या अन्य धाराओं में कार्रवाई की गई है।
कानूनी और राजनीतिक हलचल
इस केस ने राज्य की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। एक ओर विपक्ष ने सरकार पर मामले को दबाने और गवाहों को डराने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर सरकार का कहना है कि एसआईटी निष्पक्ष जांच कर रही है।
स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रिया
धर्मस्थल में इस खबर के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया है। स्थानीय लोग अब यह सवाल उठा रहे हैं कि अगर शिकायतकर्ता झूठा था तो खुदाई में हड्डियां और कंकाल कैसे मिले। वहीं, कई सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
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