- भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन से एक ही परिवार के सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई
जम्मू। जम्मू-कश्मीर एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ गया है। शनिवार का दिन यहां के रामबन और रियासी जिलों के लिए कहर लेकर आया। एक ओर रामबन जिले में बादल फटने से चार लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर रियासी जिले में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन से एक ही परिवार के सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इन दोनों घटनाओं ने घाटी को दहला दिया है और स्थानीय लोगों के बीच गम और खौफ का माहौल है।

रियासी में भूस्खलन से एक ही परिवार खत्म
रियासी जिले के महोर क्षेत्र में शनिवार सुबह भारी बारिश के चलते एक कच्चे मकान पर पहाड़ से मलबा आ गिरा। यह मकान नज़ीर अहमद का था। इस हादसे में नज़ीर अहमद, उनकी पत्नी वजीरा बेगम और उनके पांच मासूम बेटों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई –
- नजीर अहमद
- वजीरा बेगम (पत्नी)
- बिलाल अहमद (13 वर्ष)
- मोहम्मद मुस्तफा (11 वर्ष)
- मोहम्मद आदिल (8 वर्ष)
- मोहम्मद मुबारक (6 वर्ष)
- मोहम्मद वसीम (5 वर्ष)
स्थानीय लोगों ने बताया कि लगातार हो रही बारिश ने इलाके को पहले से ही असुरक्षित बना दिया था। पहाड़ी इलाकों में ढलान कमजोर हो चुके थे और शनिवार को बारिश की तेज़ धार ने जमीन को इतना नरम कर दिया कि देखते ही देखते भूस्खलन ने मकान को मलबे में बदल दिया। जब तक लोग मदद के लिए पहुंचे, पूरा परिवार मिट्टी और पत्थरों के नीचे दब चुका था।

रामबन में बादल फटा, चार की मौत, पांच लापता
इसी दिन रामबन जिले के गंडोह इलाके में बादल फटने की घटना हुई। अचानक पहाड़ों से तेज़ पानी और मलबा नीचे की ओर आया और अपने रास्ते में आने वाली झुग्गियों और मकानों को बहा ले गया। अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में चार लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं जबकि पांच लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन, SDRF और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य चला रही हैं। तेज़ पानी के बहाव और फिसलन भरी जमीन के कारण बचाव कार्य में कठिनाई आ रही है। इसके बावजूद लापता लोगों को खोजने के लिए अभियान जारी है।

भय और मातम का माहौल
दोनों घटनाओं के बाद इलाके में शोक का माहौल है। रियासी में एक ही परिवार के सात लोगों की मौत ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। वहीं रामबन में लापता लोगों के परिवार बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं कि उनके प्रियजन जीवित मिल जाएं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन ने कई बार चेतावनी जारी की थी, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के पास कहीं और जाने का विकल्प नहीं था। यही कारण है कि प्राकृतिक आपदाएं बार-बार इन परिवारों को अपना निशाना बना रही हैं।
प्राकृतिक आपदाओं का बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी इलाकों में लगातार बदलते मौसम, अनियंत्रित निर्माण और जलवायु परिवर्तन इन प्राकृतिक आपदाओं को और अधिक खतरनाक बना रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। इसके चलते हर साल कई निर्दोष लोगों की जान जा रही है।
सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी
इन घटनाओं ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम हैं? ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को समय रहते सुरक्षित आश्रय स्थल बनाने चाहिए थे, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। आपदा प्रबंधन तंत्र को भी और मज़बूत करने की ज़रूरत है।
मुख्यमंत्री ने जताया शोक
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने दोनों घटनाओं पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया। वहीं, स्थानीय अधिकारियों को राहत कार्य तेज़ करने के निर्देश दिए गए हैं।
