August 30, 2025 10:53 PM

शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदला, अब होगा ‘परशुरामपुरी’

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शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदलकर हुआ ‘परशुरामपुरी’, केंद्र ने दी मंजूरी

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले का जलालाबाद कस्बा अब ‘परशुरामपुरी’ नाम से जाना जाएगा। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए नाम परिवर्तन की अधिसूचना जारी कर दी है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि भारत सरकार को इस नाम परिवर्तन पर कोई आपत्ति नहीं है और अब राज्य सरकार आवश्यक राजपत्र अधिसूचना जारी करेगी।

जितिन प्रसाद ने जताया आभार

नाम बदलने के इस निर्णय पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री तथा पीलीभीत के सांसद जितिन प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर लिखा –
“शाहजहांपुर स्थित जलालाबाद का नाम परिवर्तित कर ‘परशुरामपुरी’ करने की अनुमति देने पर गृहमंत्री अमित शाह का हार्दिक धन्यवाद एवं आभार। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हृदय से आभार, वंदन एवं अभिनंदन। आपके मार्गदर्शन और नेतृत्व में आया यह निर्णय सम्पूर्ण सनातनी समाज के लिए गर्व का क्षण है।”

भगवान परशुराम को समर्पण

जितिन प्रसाद ने इस फैसले को भगवान परशुराम की कृपा का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह क्षण केवल शाहजहांपुर या उत्तर प्रदेश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे सनातनी समाज के लिए गर्व का विषय है। प्रसाद ने भगवान परशुराम को नमन करते हुए इसे “पुण्य कार्य” बताया और कहा कि उनकी प्रेरणा से ही यह संभव हो सका।

प्रस्ताव से मंजूरी तक

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस नाम परिवर्तन का प्रस्ताव 27 जून को केंद्र सरकार को भेजा था। लंबे विचार-विमर्श के बाद गृह मंत्रालय ने इस पर सहमति दे दी और अब औपचारिक तौर पर जलालाबाद को ‘परशुरामपुरी’ के नाम से जाना जाएगा।

ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ

जलालाबाद कस्बा लंबे समय से अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन स्थानीय स्तर पर इसके नाम परिवर्तन की मांग उठती रही थी। समाज के एक बड़े वर्ग का कहना था कि यहां भगवान परशुराम की स्मृति से जुड़े धार्मिक स्थल और मान्यताएं हैं, इसलिए कस्बे का नाम उनके नाम पर रखा जाना उचित है।

इस फैसले के बाद क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों ने भी इसे सनातन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के सम्मान के रूप में देखा है।



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