August 30, 2025 6:20 AM

सोनी सब के ‘इत्ती सी ख़ुशी’ में मचा हंगामा, अन्विता के पिता की रहस्यमयी गुमशुदगी से बढ़ी उसकी चिंता

  • दिल छू लेने वाले किस्सों और जीवन से जुड़ी कहानियों के साथ दर्शकों का दिल जीत रहा

सोनी सब का नया शो इत्ती सी ख़ुशी अपने सहज, दिल छू लेने वाले किस्सों और जीवन से जुड़ी कहानियों के साथ दर्शकों का दिल जीत रहा है। सोमवार से शनिवार रात 9 बजे प्रसारित होने वाला यह शो अन्विता (सुम्बुल तौकीर ख़ान) की यात्रा को दर्शाता है —एक ऐसी युवती, जो रिश्तों और मुश्किल हालात के बीच जूझते हुए जीवन का सफ़र तय कर रही है। जहाँ उसकी उम्र की ज्यादातर लड़कियाँ सपनों और महत्वाकांक्षाओं के पीछे दौड़ती हैं, वहीं अन्विता का एक ही सपना है—अपनों को सुरक्षित, एकजुट और संभाले रखना। छोटे-मोटे काम करके घर चलाना, बिलों का भुगतान करना और पाँच छोटे भाई-बहनों की परवरिश—अन्विता का हर पल उसकी मजबूती और निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है। उसके संघर्षों के केंद्र में है उसके पिता सुहास (वरुण बडोला), जो शराब की लत के कारण लंबे समय से सहारा नहीं बन पाए हैं। बावजूद इसके, अन्विता बिना किसी शिकायत के उनकी देखभाल करती रहती है। उसका बचपन का दोस्त संजय (ऋषि सक्सेना) एक दयालु पुलिस अफ़सर है और अक्सर नशे में धुत सुहास को घर लेकर आता है।
आने वाले एपिसोड्स में अन्विता की चुनौतियाँ और गहरी होती नजर आएंगी। जैसे ही वह घर के बिलों से राहत की साँस लेती है, नए मोर्चे सामने आ जाते हैं— शरारती छोटे भाई चिकू (हर्ष प्रकाश झा) की जिम्मेदारी से लेकर गणित के जीनियस भाई सिद्धू (सचिन चौधरी) को उसकी पहली मोहब्बत की राह पर सँभालने तक। इसी बीच, अन्विता की निजी ज़िंदगी में भी हलचल शुरू हो जाती है, जब विराट (रजत वर्मा) एक हादसे से उसे बचाकर पहली नज़र में ही उससे प्यार कर बैठता है। विराट का खुला स्नेह और उसका दिल जीतने का जुनून, अन्विता के जीवन में नई भावनाएँ जगाता है, जिन्हें संजय का स्थिर और अनकहा साथ और उलझा देता है। लेकिन जैसे ही अन्विता अपने दिल की आवाज़ से सामना करने लगती है, तभी उसका पिता सुहास अचानक ग़ायब हो जाता है। और जब अन्विता एक निर्माण स्थल पर चौंकाने वाला दृश्य देखती है, तो उसे सबसे बुरे की आशंका सताने लगती है, जिससे उसका भविष्य सवालों से घिर जाता है।
आगामी ट्रैक के बारे में सुम्बुल तौकीर ख़ान ने कहा , “अन्विता की यात्रा संघर्षों से भरी है, लेकिन यह दिल से भी भरी है। वह ऐसी शख्सियत है जो कभी हार नहीं मानती, चाहे जीवन कितना ही भारी क्यों न हो। उसकी चुपचाप ताक़त उसके गहरे प्रेम और बिना किसी अपेक्षा के किए गए बलिदान से आती है। कहानी का यह नया चरण, जहाँ अन्विता के पिता सुहास अचानक ग़ायब हो जाते हैं, मेरे लिए चुनौतीपूर्ण था क्योंकि इसमें उसके दर्द और डर की गहराई को निभाना था। बावजूद इसके कि उन्होंने उसे कितना कष्ट दिया है, उसका प्रेम और चिंता उनके लिए बेमिसाल और बिना शर्त है। मुझे लगता है कि दर्शक अन्विता के संघर्ष से जुड़ेंगे, क्योंकि अंततः यह रिश्तों की डोर और अपनों के लिए कठिन से कठिन समय में मज़बूत बने रहने की कहानी है।”

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