इजराइली हमले में अलजजीरा के 5 पत्रकारों की मौत, गाजा के रिपोर्टर अनस को निशाना बनाने का दावा
गाजा।
इजराइल और हमास के बीच जारी संघर्ष में एक बार फिर मीडिया जगत को गहरा झटका लगा है। गाजा के अल शिफा अस्पताल के बाहर इजराइली हमले में कम से कम 5 पत्रकारों की मौत हो गई। ये सभी पत्रकार अलजजीरा और अन्य स्थानीय मीडिया संस्थानों से जुड़े थे और संघर्ष के हालात को रिपोर्ट करने में जुटे थे। अलजजीरा ने पुष्टि की है कि मारे गए पत्रकारों में उनके मशहूर रिपोर्टर अनस अल-शरीफ, मोहम्मद करीकेह, कैमरामैन इब्राहिम जहीर, मोआमेन अलीवा और मोहम्मद नौफल शामिल हैं।
अस्पताल के बाहर बना था प्रेस कैंप
संघर्ष क्षेत्र में रिपोर्टिंग के लिए इन पत्रकारों ने अल शिफा अस्पताल के बाहर एक अस्थायी प्रेस कैंप लगाया हुआ था। यह जगह अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती थी, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में मरीज, उनके परिजन और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हमले के वक्त ये पत्रकार वहीं मौजूद थे और दिनभर की घटनाओं को कवर कर रहे थे।
हमले में कुल 7 लोगों की मौत
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस हमले में कुल 7 लोगों की जान गई है, जिनमें 5 पत्रकार और 2 अन्य नागरिक शामिल हैं। घटना के तुरंत बाद घायल लोगों को अस्पताल के अंदर ले जाया गया, लेकिन ज्यादातर की हालत गंभीर थी और उन्हें बचाया नहीं जा सका।

इजराइली सेना का कबूलनामा और आरोप
हमले के कुछ ही घंटों बाद इजराइली सेना ने स्वीकार किया कि उन्होंने रिपोर्टर अनस अल-शरीफ को निशाना बनाया था। सेना का दावा है कि अनस सिर्फ पत्रकार नहीं थे, बल्कि हमास के आतंकी विंग में सक्रिय भूमिका निभा चुके थे। इजराइल का आरोप है कि अनस एक “आतंकी सेल” के प्रमुख रह चुके थे, जिनका काम इजराइली नागरिकों और सैनिकों पर रॉकेट हमलों की योजना बनाना और उन्हें अंजाम देना था।
अलजजीरा का कड़ा विरोध
दूसरी ओर, अलजजीरा नेटवर्क ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। चैनल का कहना है कि अनस अल-शरीफ एक साहसी और ईमानदार पत्रकार थे, जिन्होंने संघर्ष की सबसे खतरनाक परिस्थितियों में भी सच्चाई सामने लाने का काम किया। अलजजीरा ने कहा कि यह हमला न केवल पत्रकारिता पर, बल्कि सच को दबाने की कोशिश पर भी सीधा वार है।
गाजा में पत्रकारों के लिए बढ़ता खतरा
गाजा में चल रहे संघर्ष के दौरान अब तक दर्जनों पत्रकार मारे जा चुके हैं। युद्ध क्षेत्र में काम कर रहे मीडिया कर्मियों को लगातार निशाना बनाए जाने की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय पत्रकार संगठन और मानवाधिकार समूह पहले ही इजराइल और हमास दोनों से अपील कर चुके हैं कि वे पत्रकारों और नागरिकों को निशाना न बनाएं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
इस घटना पर कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स (RSF) ने इसे युद्ध अपराध करार देते हुए कहा कि युद्ध क्षेत्र में पत्रकारों पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है। वहीं, प्रेस फ्रीडम एडवोकेसी ग्रुप्स ने कहा कि संघर्ष चाहे कितना भी भीषण क्यों न हो, सच को दबाने के लिए मीडिया कर्मियों पर हमला अस्वीकार्य है।
परिवारों में शोक और गुस्सा
अनस अल-शरीफ और अन्य मृत पत्रकारों के परिजन सदमे में हैं। उनका कहना है कि उनके प्रियजन लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते थे, लेकिन उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया। गाजा में पत्रकारों की सुरक्षा अब एक बड़ा सवाल बन चुकी है, क्योंकि यहां न तो किसी सुरक्षित क्षेत्र की गारंटी है और न ही युद्ध में गैर-लड़ाकों के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन हो रहा है।
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