आईपीएस अधिकारी पराग जैन होंगे रॉ प्रमुख
नई दिल्ली। भारत सरकार ने देश की प्रमुख बाह्य खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के नए प्रमुख के तौर पर आईपीएस अधिकारी पराग जैन की नियुक्ति की है। वे पंजाब कैडर के 1989 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं और मौजूदा रॉ प्रमुख रवि सिन्हा का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 जून 2025 को समाप्त हो रहा है। पराग जैन का कार्यकाल दो वर्ष का होगा, और वे 1 जुलाई 2027 तक इस अहम जिम्मेदारी को निभाएंगे।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में निभाई थी केंद्रीय भूमिका
पराग जैन वर्तमान में एविएशन रिसर्च सेंटर (ARC) के प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। यह केंद्र भारतीय वायुसीमा में अत्याधुनिक हवाई निगरानी और खुफिया जानकारी एकत्र करने के लिए जाना जाता है। उनके नेतृत्व में ARC ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को सफलतापूर्वक अंजाम दिया, जिसके तहत पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों और सशस्त्र बलों की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी गई और महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी हासिल की गई।
यह ऑपरेशन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है और इसमें ARC ने तकनीकी और मानवीय दोनों प्रकार की खुफिया क्षमताओं का प्रभावी उपयोग किया। यह मिशन भारत की सामरिक तैयारियों को मजबूत करने में निर्णायक साबित हुआ।
‘सुपर जासूस’ के रूप में पहचान
खुफिया हलकों में पराग जैन को ‘सुपर स्पाई’ यानी ‘सुपर जासूस’ के रूप में जाना जाता है। उनकी सबसे बड़ी खासियत है कि वे मानव खुफिया (HUMINT) और तकनीकी खुफिया (TECHINT) का समन्वय बेहद प्रभावी ढंग से करते हैं। उन्होंने कई उच्च स्तरीय अभियानों में यह साबित किया है कि कैसे दोनों माध्यमों को मिलाकर दुश्मन की गतिविधियों की सटीक जानकारी हासिल की जा सकती है।
पंजाब में आतंकवाद के दौर में भी निभाई भूमिका
पराग जैन ने अपने करियर की शुरुआत के वर्षों में पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। उस समय पंजाब आतंकवादी गतिविधियों से जूझ रहा था और उन्होंने भटिंडा, मानसा, और होशियारपुर जैसे जिलों में मोर्चा संभाला। उनके अनुभव और रणनीतिक कौशल ने वहां की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद की।
इसके अलावा वे चंडीगढ़ के एसएसपी और लुधियाना के डीआईजी जैसे उच्च पदों पर भी काम कर चुके हैं।
रॉ में व्यापक अनुभव, कई संवेदनशील ऑपरेशन का हिस्सा
पराग जैन का रॉ के साथ लंबा जुड़ाव रहा है। वे पहले भी रॉ में पाकिस्तान डेस्क को संभाल चुके हैं और सीमा पार गतिविधियों की निगरानी से लेकर रणनीतिक खुफिया योजनाओं के निर्माण में योगदान दे चुके हैं।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:
- अनुच्छेद 370 हटाए जाने के दौरान जम्मू-कश्मीर में खुफिया संचालन
- बालाकोट एयरस्ट्राइक के समय उच्च स्तर की समन्वय भूमिका
- कनाडा और श्रीलंका में भारतीय खुफिया प्रतिनिधि के रूप में विदेशों में कार्यानुभव
नए दौर की खुफिया रणनीतियों में दक्ष
भारतीय खुफिया तंत्र अब परंपरागत तरीकों के साथ-साथ साइबर खुफिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उपग्रह आधारित निगरानी पर जोर दे रहा है। पराग जैन को इस बदलाव के लिए सबसे उपयुक्त अधिकारी माना जा रहा है। उनके पास वैश्विक परिप्रेक्ष्य के साथ-साथ जमीनी सच्चाइयों को समझने का गहरा अनुभव है।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब भारत की सुरक्षा चुनौतियाँ लगातार जटिल होती जा रही हैं – विशेषकर चीन और पाकिस्तान की ओर से सैन्य व साइबर खतरों को लेकर।
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