अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील की संभावना, भारत को मिल सकता है सस्ता और वैकल्पिक तेल स्रोत

वॉशिंगटन डीसी। वैश्विक ऊर्जा राजनीति में एक अहम बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका भारत को वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की अनुमति दे सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया है कि अमेरिका की निगरानी और कुछ शर्तों के साथ भारत को वेनेजुएला से तेल आयात की इजाजत दी जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वर्षों से ठप पड़ा यह व्यापार फिर से शुरू हो सकेगा। हालांकि, इस अनुमति से जुड़ी शर्तों को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

इस बीच, खबर है कि भारत की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज भी वेनेजुएला का तेल खरीदने के लिए अमेरिका से मंजूरी लेने की कोशिशों में जुट गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति, भू-राजनीतिक दबाव और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर हालात तेजी से बदल रहे हैं।

ट्रम्प की तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से अहम बैठक

शुक्रवार को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में करीब 9 लाख करोड़ रुपये के संभावित निवेश पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि अमेरिका वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार को फिर से वैश्विक बाजार से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है, ताकि ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके और तेल की कीमतों पर नियंत्रण बना रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में निवेश और सीमित निर्यात को हरी झंडी देता है, तो इसका सीधा लाभ भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को मिल सकता है।

अमेरिकी प्रतिबंधों ने रोका था भारत-वेनेजुएला तेल व्यापार

वेनेजुएला पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज संगठन का सदस्य है और उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है। इसके बावजूद वह वैश्विक तेल आपूर्ति में केवल करीब एक प्रतिशत का योगदान देता है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंध रहे हैं।

2019 में अमेरिका ने वेनेजुएला पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इसके तहत सेकेंडरी प्रतिबंध भी लागू किए गए, यानी जो भी देश या कंपनी वेनेजुएला से तेल खरीदती, उसे अमेरिकी बाजार, बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली से बाहर किया जा सकता था। इन प्रतिबंधों के चलते भारत सहित कई देशों ने वेनेजुएला से तेल खरीदना बंद कर दिया।

भारत पहले वेनेजुएला का बड़ा ग्राहक रहा है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, एक समय भारत अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 6 प्रतिशत वेनेजुएला से खरीदता था। प्रतिबंधों के बाद यह आपूर्ति लगभग पूरी तरह बंद हो गई, जिससे भारत को अन्य स्रोतों पर निर्भर होना पड़ा।

आंशिक ढील के बाद फिर बढ़ा आयात, फिर आई सख्ती

अमेरिका ने 2023 और 2024 के दौरान वेनेजुएला पर आंशिक रूप से प्रतिबंधों में ढील दी थी। इसके बाद भारत ने सीमित मात्रा में फिर से वेनेजुएला से तेल आयात शुरू किया। वर्ष 2024 में भारत का आयात औसतन 63,000 से लेकर 1 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया।

इसके बाद 2025 में वेनेजुएला से भारत का कुल तेल आयात बढ़कर करीब 1.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, मई 2025 में अमेरिका ने एक बार फिर वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर सख्ती बढ़ा दी। इसका असर यह हुआ कि 2026 की शुरुआत में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में वेनेजुएला की हिस्सेदारी घटकर महज 0.3 प्रतिशत रह गई।

भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिए अहम विकल्प

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है। देश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और परिवहन क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए कच्चे तेल का आयात बेहद जरूरी है। ऐसे में यदि भारत को वेनेजुएला से फिर से तेल खरीदने की अनुमति मिलती है, तो उसे तेल आयात के लिए एक और महत्वपूर्ण विकल्प मिल जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और वह किसी एक या दो देशों पर अत्यधिक निर्भरता से बच सकेगा। साथ ही, वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से निपटने में भी भारत को मदद मिलेगी।

रिलायंस की कोशिशें और रूस से तेल पर दबाव

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वेनेजुएला से कच्चा तेल फिर से खरीदने के लिए अमेरिका से मंजूरी लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस मामले से जुड़े दो सूत्रों ने जानकारी दी है कि रिलायंस के प्रतिनिधि इस संबंध में अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट और ट्रेजरी डिपार्टमेंट से बातचीत कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि पश्चिमी देश भारत पर रूस से तेल आयात कम करने का दबाव बना रहे हैं। ऐसे में रिलायंस अपने लिए वैकल्पिक और भरोसेमंद तेल आपूर्ति स्रोत सुरक्षित करना चाहती है। हालांकि, इस पूरे मामले पर रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से रॉयटर्स द्वारा भेजे गए ईमेल का तत्काल कोई जवाब नहीं दिया गया है।

ऊर्जा राजनीति में भारत की भूमिका और आगे की राह

यदि अमेरिका भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदने की अनुमति देता है, तो यह केवल एक व्यापारिक फैसला नहीं होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा राजनीति में एक बड़ा संकेत माना जाएगा। इससे भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी और वह वैश्विक ऊर्जा बाजार में अधिक संतुलित भूमिका निभा सकेगा। आने वाले दिनों में अमेरिका की शर्तें और आधिकारिक घोषणा इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगी।