उत्तर कोरिया ने हथियारों के प्रदर्शन से दिखाया आक्रामक रुख, एशिया में बढ़ा तनाव
सियोल। वैश्विक राजनीति और सुरक्षा संतुलन के बीच उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता Kim Jong Un ने हाइपरसोनिक मिसाइलों के परीक्षण का निरीक्षण किया और स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश को अपनी युद्ध-निवारक क्षमता और आक्रामक हथियार प्रणालियों को लगातार मजबूत करते रहना होगा। इस कदम को सीधे तौर पर अमेरिका के लिए संदेश माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump पहले से ही कई अंतरराष्ट्रीय मोर्चों पर दबाव का सामना कर रहे हैं।
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के अनुसार, यह परीक्षण-उड़ानें हाइपरसोनिक हथियार प्रणाली की तत्परता जांचने, मिसाइल बलों की परिचालन क्षमता बढ़ाने और देश की समग्र युद्ध-निवारक शक्ति का मूल्यांकन करने के उद्देश्य से की गईं। किम जोंग उन ने कहा कि हालिया अभ्यास यह साबित करता है कि राष्ट्रीय रक्षा से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकी लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया गया है।
क्यों अहम है हाइपरसोनिक मिसाइल परीक्षण
हाइपरसोनिक मिसाइलें अपनी अत्यधिक गति और उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता के कारण पारंपरिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए बड़ी चुनौती मानी जाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि उत्तर कोरिया इस तकनीक को पूरी तरह विकसित कर लेता है, तो वह अमेरिका और दक्षिण कोरिया की मिसाइल डिफेंस शील्ड को भेदने में सक्षम हो सकता है। यही वजह है कि इस परीक्षण को केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, कई अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञ अब भी इस बात पर संदेह जताते हैं कि उत्तर कोरिया की ओर से परीक्षण की गई मिसाइलें वास्तव में हाइपरसोनिक श्रेणी की सभी तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा कर पाई हैं या नहीं। इसके बावजूद, लगातार हो रहे परीक्षण यह संकेत देते हैं कि प्योंगयांग इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
हथियारों के प्रदर्शन से पहले राजनीतिक संदेश
यह मिसाइल परीक्षण ऐसे समय में सामने आया है, जब दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae-myung चीन के दौरे पर रवाना होने वाले थे और वहां राष्ट्रपति Xi Jinping के साथ शिखर सम्मेलन में उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा होनी है। विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर कोरिया ने जानबूझकर यह परीक्षण इस समय किया, ताकि क्षेत्रीय कूटनीति पर दबाव बनाया जा सके और यह दिखाया जा सके कि वह किसी भी बातचीत में कमजोर पक्ष नहीं है।
पिछले कुछ हफ्तों में उत्तर कोरिया ने लंबी दूरी की रणनीतिक क्रूज मिसाइलों, नई वायु-रोधी मिसाइल प्रणालियों और परमाणु-संचालित पनडुब्बी निर्माण में प्रगति से जुड़ी तस्वीरें भी जारी की हैं। इन सभी कदमों को सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के आगामी प्रमुख सम्मेलन से पहले अपनी सैन्य उपलब्धियों को प्रदर्शित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अमेरिका और सहयोगियों के लिए बढ़ी चुनौती
उत्तर कोरिया की यह आक्रामक रणनीति अमेरिका के लिए नई चुनौती खड़ी कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला समेत अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों की उत्तर कोरिया ने खुलकर निंदा की है और इसे अमेरिका के “दुष्ट और क्रूर” रवैये का उदाहरण बताया है। उत्तर कोरिया का मानना है कि अमेरिकी दबाव और सैन्य कार्रवाइयों के बीच अपनी संप्रभुता और शासन की सुरक्षा के लिए उसे परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को और मजबूत करना जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, किम जोंग उन की यह रणनीति अमेरिका को यह संदेश देने की कोशिश है कि उत्तर कोरिया किसी भी तरह के सैन्य या कूटनीतिक दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। वहीं, अमेरिका और उसके सहयोगियों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या बातचीत का रास्ता दोबारा खोला जाए या प्रतिबंधों और दबाव की नीति को और सख्त किया जाए।
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