ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बयानों, धमकियों और हवाई क्षेत्र बंद होने से हालात और गंभीर
वॉशिंगटन डीसी/तेहरान। अमेरिका की कड़ी चेतावनी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आक्रामक रुख के बाद ईरान सरकार अपने ही ऐलान से पीछे हटती नजर आ रही है। ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की योजना पर अब आधिकारिक तौर पर रोक की बात कही गई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने साफ कहा है कि सरकार की ओर से किसी भी प्रदर्शनकारी को फांसी देने की कोई योजना नहीं है। विदेश मंत्री ने फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम ‘स्पेशल रिपोर्ट विद ब्रेट बेयर’ में दिए इंटरव्यू में स्पष्ट शब्दों में कहा कि फांसी देने का सवाल ही नहीं उठता। यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान में तेज़ ट्रायल चलाकर विरोध करने वालों को जल्द सजा देने की सरकारी घोषणा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी थी।
ट्रम्प की धमकी के बाद बदला माहौल
ईरान सरकार के इस यू-टर्न को सीधे तौर पर राष्ट्रपति ट्रम्प की धमकी से जोड़कर देखा जा रहा है। ट्रम्प ने पहले चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी दी, तो अमेरिका की ओर से बेहद कड़ा और भयावह जवाब दिया जाएगा। ट्रम्प ने यहां तक कहा था कि “अगर वे फांसी देते हैं, तो आप कुछ ऐसा देखेंगे, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।” इसी क्रम में ट्रम्प ने बुधवार को दावा किया कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रुक गई हैं। उन्होंने इसे अपनी चेतावनी का नतीजा बताया। इससे पहले ईरान सरकार ने तेज़ सुनवाई और त्वरित फांसी की नीति अपनाने का ऐलान किया था और 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी इरफान सुलतानी को फांसी देने की तैयारी चल रही थी।
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ट्रम्प को जान से मारने की धमकी से बढ़ा तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव उस समय और बढ़ गया, जब ईरान के सरकारी टीवी चैनल पर राष्ट्रपति ट्रम्प को जान से मारने की धमकी प्रसारित की गई। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह धमकी फारसी भाषा में दी गई इस धमकी को ट्रम्प के खिलाफ तेहरान की अब तक की सबसे सीधी और गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। इससे पहले भी ट्रम्प कई बार ईरान को चेतावनी दे चुके हैं कि यदि उसने विरोधी प्रदर्शनकारियों पर दमन जारी रखा, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।
ईरानी विपक्ष पर भी ट्रम्प की टिप्पणी
इसी बीच ट्रम्प ने ईरान के विपक्षी नेता रजा पहलवी को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि रजा पहलवी उन्हें अच्छे लगते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान के भीतर उन्हें कितना समर्थन मिलेगा। ट्रम्प ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि ईरानी जनता पहलवी के नेतृत्व को स्वीकार करेगी या नहीं, लेकिन यदि ऐसा होता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। इस बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान में सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं पर भी नजर बनाए हुए है, हालांकि ट्रम्प ने यह भी कहा कि स्थिति अभी उस स्तर तक नहीं पहुंची है।
हवाई क्षेत्र बंद, एयरलाइंस पर असर
अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव और देशभर में विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरान ने बुधवार को बड़ा कदम उठाते हुए लगभग दो घंटे के लिए अपने हवाई क्षेत्र का बड़ा हिस्सा बंद कर दिया। फ्लाइटराडार24 के अनुसार, तेहरान ने नोटिस टू एयर मिशन्स जारी कर ईरान से आने-जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को छोड़कर बाकी सभी उड़ानों पर रोक लगा दी।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया, जब अमेरिका ने कतर स्थित अपने सैन्य ठिकानों से कुछ कर्मियों को वापस बुलाना शुरू कर दिया था। ईरान ने चेतावनी दी थी कि यदि वॉशिंगटन ने हमला किया, तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा।
इस बंदी का असर कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस पर पड़ा। इंडिगो, लुफ्थांसा और एयरोफ्लोट जैसी कंपनियों ने ईरानी हवाई क्षेत्र से बचने का फैसला किया। इंडिगो ने कहा कि अचानक हवाई क्षेत्र बंद होने से उसकी कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं, जबकि एयर इंडिया ने बताया कि उसकी उड़ानें अब वैकल्पिक मार्गों से संचालित की जा रही हैं, जिससे देरी हो सकती है। \
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भारत ने जारी की एडवाइजरी
बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने कहा है कि ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिक, चाहे वे छात्र हों, तीर्थयात्री हों, व्यापारी हों या पर्यटक, उन्हें जल्द से जल्द ईरान छोड़ देना चाहिए। वर्तमान में ईरान में दस हजार से अधिक भारतीय नागरिक मौजूद हैं।
यह एडवाइजरी पांच जनवरी को जारी की गई पिछली चेतावनी का विस्तार है। इसमें भारतीयों से अपील की गई है कि वे विरोध प्रदर्शनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें, भारतीय दूतावास के संपर्क में बने रहें और स्थानीय मीडिया पर नजर रखें। इसी कड़ी में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची से फोन पर बातचीत कर हालात की जानकारी ली। भारत के अलावा स्पेन, इटली और पोलैंड ने भी अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है।
अंतरराष्ट्रीय चिंता के बीच अनिश्चित हालात
ईरान-अमेरिका तनाव, प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई, हवाई क्षेत्र बंद होना और विदेशी नागरिकों को निकासी की सलाह—ये सभी घटनाएं इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि पश्चिम एशिया में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। ईरान का फांसी से पीछे हटना फिलहाल राहत की खबर है, लेकिन आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, इस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।
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