ईरान में हिंसक प्रदर्शनों के बीच सख्त रुख, अमेरिकी दखल और नए प्रतिबंधों से हालात और गंभीर

तेहरान। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पर कोई भी हमला हुआ, तो उसे ईरान के खिलाफ सीधी जंग माना जाएगा। राष्ट्रपति पजशकियान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी अपने बयान में कहा कि ऐसे किसी भी कदम का जवाब अत्यंत कठोर होगा और इसके परिणामों पर हमलावरों को पछताना पड़ेगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के रिश्ते पहले से ही बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं।

ट्रम्प के बयान के बाद तीखी प्रतिक्रिया

ईरानी राष्ट्रपति की यह चेतावनी सीधे तौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयानों से जुड़ी मानी जा रही है। ट्रम्प ने कुछ दिन पहले कहा था कि यदि ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं और फांसी की घटनाएं जारी रहीं, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने पर विचार कर सकता है। ट्रम्प के इस बयान को ईरान ने अपनी संप्रभुता में दखल के रूप में देखा है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका ऐसे बयानों के जरिए आंतरिक मामलों में दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

28 दिसंबर से जारी हिंसा, मौतों का भयावह आंकड़ा

ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन लगातार हिंसक होते चले गए हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि अब तक इन झड़पों और हिंसक घटनाओं में लगभग 5,000 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में करीब 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं। ये आंकड़े यदि सही हैं, तो यह हाल के वर्षों में ईरान में हुई सबसे बड़ी और घातक अशांति मानी जाएगी। हालांकि सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

दावा: ट्रम्प के दबाव में फांसी की योजनाएं रोकी गईं

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने 15 जनवरी को यह दावा किया था कि ईरान में हत्याओं की घटनाएं अब कम हो रही हैं। व्हाइट हाउस की ओर से भी कहा गया कि ट्रम्प प्रशासन के दबाव के चलते ईरान ने करीब 800 लोगों को फांसी देने की कथित योजना पर रोक लगा दी है। अमेरिका इसे अपनी कूटनीतिक सख्ती का परिणाम बता रहा है, जबकि ईरान इन दावों को खारिज करता रहा है।

संयुक्त राष्ट्र ने जताई गंभीर चिंता

संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव मार्था पोबी ने सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए कहा कि ईरान में प्रदर्शन बेहद तेजी से फैले हैं और इससे भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि अब तक 3,428 प्रदर्शनकारियों को मार दिया गया है और 18,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने साफ किया है कि वह इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है।

अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध

तनाव के बीच ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी नेतृत्व पर नए आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए हैं। अमेरिका ने 18 ईरानी व्यक्तियों और संस्थाओं को निशाने पर लेते हुए प्रतिबंधों की घोषणा की है। इनमें ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ये वही लोग हैं, जिन्होंने प्रदर्शनों को कुचलने के लिए कठोर कार्रवाई की योजनाएं बनाईं। उनके अनुसार, राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।

आर्थिक संकट और बढ़ती बेचैनी

ईरान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बोझ तले दबा हुआ है। इन प्रतिबंधों के कारण उसकी अर्थव्यवस्था कमजोर होती चली गई है, महंगाई बढ़ी है और बेरोजगारी ने गंभीर रूप ले लिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यही आर्थिक संकट मौजूदा विरोध-प्रदर्शनों की बड़ी वजह है। अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों से हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिससे ईरान-अमेरिका टकराव और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।