महंगाई और बदहाल अर्थव्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता, 31 प्रांतों में फैला सरकार विरोधी आंदोलन

तेहरान। ईरान में सरकार के खिलाफ जारी जनआंदोलन ने अब बेहद हिंसक और खतरनाक रूप ले लिया है। खराब अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता पिछले 13 दिनों से सड़कों पर है और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रशासन के खिलाफ खुलकर नारेबाजी कर रही है। इस बीच आंदोलन को कुचलने के लिए सुरक्षा बलों की ओर से की गई कार्रवाई को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। एक ईरानी डॉक्टर ने कहा है कि केवल राजधानी तेहरान में ही 217 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश को गोलियां मारी गईं।

ईरान से मिल रही रिपोर्टों के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन अब देश के सभी 31 प्रांतों में फैल चुका है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि सरकार ने इंटरनेट और फोन सेवाओं पर लगभग पूरी तरह रोक लगा दी है, ताकि प्रदर्शनकारियों की आवाज दुनिया तक न पहुंच सके।

डॉक्टर का सनसनीखेज दावा, अस्पतालों में दर्ज हुईं 217 मौतें

अमेरिकी पत्रिका टाइम पत्रिका की एक रिपोर्ट में तेहरान के एक डॉक्टर के हवाले से यह दावा किया गया है। डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राजधानी के केवल छह बड़े अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। डॉक्टर के अनुसार, इनमें से ज्यादातर लोगों की मौत सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलीबारी में हुई है।

डॉक्टर का कहना है कि अस्पतालों में लगातार घायल प्रदर्शनकारियों को लाया जा रहा है, जिनमें कई की हालत बेहद गंभीर थी। हालांकि टाइम पत्रिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन अगर ये आंकड़े सही हैं, तो यह ईरान में सरकारी दमन की भयावह तस्वीर पेश करते हैं।

आंदोलन दबाने के लिए गोलीबारी, दहशत में आम लोग

डॉक्टर के दावे और अन्य रिपोर्टों से संकेत मिलते हैं कि ईरानी सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चलाने के आदेश दिए गए हैं। कई इलाकों में सड़कों पर खून बिखरा होने और शवों को जल्दबाजी में हटाए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पहले आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया और उसके बाद गोलियां चलाई गईं।

अगर राजधानी तेहरान में ही 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, तो पूरे देश में मरने वालों की संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। इससे साफ है कि सरकार आंदोलन को किसी भी कीमत पर दबाने की कोशिश कर रही है।

इंटरनेट और फोन सेवाएं लगभग पूरी तरह बंद

सरकार विरोधी आंदोलन के बीच ईरान में डिजिटल ब्लैकआउट भी लागू कर दिया गया है। इंटरनेट स्वतंत्रता पर नजर रखने वाली संस्था नेटब्लॉक्स ने बताया है कि देशभर में इंटरनेट सेवाएं लगभग पूरी तरह ठप कर दी गई हैं। संस्था के अनुसार, राष्ट्रव्यापी इंटरनेट बंद हुए 24 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं और कनेक्टिविटी सामान्य स्तर के सिर्फ 1 प्रतिशत पर आकर स्थिर हो गई है।

नेटब्लॉक्स का कहना है कि यह डिजिटल ब्लैकआउट ईरानी नागरिकों के मौलिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन है। साथ ही इससे सुरक्षा बलों की हिंसा को छिपाने में भी मदद मिल रही है, क्योंकि लोग वीडियो या तस्वीरें साझा नहीं कर पा रहे हैं।

सत्ता के खिलाफ जनता का हल्ला बोल

ईरान में यह आंदोलन केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है। प्रदर्शनकारी अब सीधे सत्ता और शासन व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। सड़कों पर “तानाशाही खत्म करो” और “आजादी चाहिए” जैसे नारे गूंज रहे हैं। कई शहरों में सरकारी इमारतों और सुरक्षा चौकियों के पास भी प्रदर्शन हुए हैं, जिससे शासन की चिंता और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंदोलन पिछले कई वर्षों में ईरान में हुआ सबसे व्यापक और संगठित विरोध प्रदर्शन है, जिसने सत्ता की नींव को हिलाकर रख दिया है।

विरोध के बीच खामेनेई का तीखा बयान

देश में बढ़ती अशांति के बीच शुक्रवार को सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। खामेनेई ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें ईरान पर टिप्पणी करने के बजाय अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।

खामेनेई ने कहा कि कुछ लोग दूसरे देश के नेताओं को खुश करने के लिए अपने ही देश को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि ईरान विदेशी ताकतों के भाड़े के सैनिकों को बर्दाश्त नहीं करेगा। उनके इस बयान को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें ईरान पर

ईरान में हालात जिस तरह बिगड़ते जा रहे हैं, उससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ रही है। मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से संयम बरतने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा रोकने की अपील की है। हालांकि, ईरानी शासन फिलहाल किसी भी तरह के दबाव को स्वीकार करने के मूड में नजर नहीं आ रहा है।

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह आंदोलन किस दिशा में जाता है और क्या सरकार जनता की मांगों को सुनने के लिए कोई कदम उठाती है या फिर दमन का रास्ता और कठोर होता है।