दोहा में जारी बयान, ट्रम्प के शांति प्लान को अंतरराष्ट्रीय समर्थन बढ़ा

दोहा। गाजा संकट के समाधान और पुनर्निर्माण के लिए बनाए गए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर बड़ा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम सामने आया है। आठ इस्लामिक देशों ने इस बोर्ड में शामिल होने पर सहमति जता दी है। इनमें कतर, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इन देशों के विदेश मंत्रियों ने कतर की राजधानी दोहा में संयुक्त बयान जारी कर इसकी औपचारिक घोषणा की।

संयुक्त बयान में कहा गया है कि यह फैसला आपसी सहमति से लिया गया है और सभी देश अपने-अपने संवैधानिक, कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत गाजा बोर्ड ऑफ पीस से जुड़ने से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेंगे। इस कदम को गाजा में युद्धविराम के बाद शांति, प्रशासन और पुनर्निर्माण की दिशा में एक अहम अंतरराष्ट्रीय पहल माना जा रहा है।

ट्रम्प का दावा: पुतिन भी बोर्ड में शामिल होने को तैयार

गाजा पीस बोर्ड को लेकर ट्रम्प ने एक और बड़ा दावा किया है। स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान उन्होंने कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने पर सहमति जता दी है। ट्रम्प के अनुसार, पुतिन को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

हालांकि, इस पर रूस की ओर से सतर्क प्रतिक्रिया सामने आई है। पुतिन ने कहा है कि बोर्ड में औपचारिक भागीदारी को लेकर अंतिम फैसला रणनीतिक साझेदारों से विचार-विमर्श के बाद ही किया जाएगा। वहीं, व्हाइट हाउस के मुताबिक अब तक करीब 50 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता दिया गया है, जिनमें से 35 से अधिक देश अपनी सहमति जता चुके हैं।

रूस की एक अरब डॉलर की पेशकश

गाजा पीस बोर्ड को आर्थिक सहयोग के मोर्चे पर भी बड़ा समर्थन मिलने की संभावना है। रूस ने इस बोर्ड को एक अरब डॉलर देने की पेशकश की है। राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भले ही रूस की औपचारिक भागीदारी पर अंतिम निर्णय बाकी हो, लेकिन वह गाजा के पुनर्निर्माण के लिए इस राशि पर विचार कर सकता है।

पुतिन ने स्पष्ट किया कि यह धनराशि उस रूसी संपत्ति से ली जा सकती है, जिसे अमेरिका ने पिछली सरकार के दौरान फ्रीज कर दिया था। वर्ष 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे, जिसके तहत रूस के सेंट्रल बैंक और सरकारी फंड से जुड़ी अरबों डॉलर की संपत्तियां फ्रीज कर दी गई थीं। इन संपत्तियों पर रूस का स्वामित्व तो है, लेकिन बिना अमेरिकी अनुमति उनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अब पुतिन इन्हीं फ्रीज संपत्तियों से गाजा पीस बोर्ड को आर्थिक मदद देने की बात कर रहे हैं।

गाजा पीस प्लान दूसरे चरण में, नई प्रशासनिक व्यवस्था

सीजफायर के बाद गाजा पीस प्लान अब दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। ट्रम्प ने गाजा के प्रशासन और पुनर्निर्माण के लिए ‘नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा’ के गठन की घोषणा की है। इस कमेटी की निगरानी, फंड जुटाने और नीतिगत फैसलों के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता खुद ट्रम्प कर रहे हैं। इसके साथ ही एक अलग गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी बनाया गया है।

इजराइल की नाराजगी, बिना सलाह के फैसले का आरोप

हालांकि, ट्रम्प के इस पीस बोर्ड को लेकर इजराइल ने नाराजगी जाहिर की है। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा है कि गाजा के लिए नए प्रशासनिक बोर्ड की घोषणा अमेरिका ने इजराइल से बिना किसी चर्चा के कर दी, जो उसकी सरकारी नीति के खिलाफ है।

इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार इस मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने उठाने वाले हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इजराइल की मुख्य आपत्ति तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान को बोर्ड में शामिल किए जाने को लेकर है। इजराइल तुर्किये को हमास समर्थक मानता है और दोनों देशों के रिश्ते पहले से तनावपूर्ण हैं।

तुर्किये की भूमिका पर विवाद

तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगन ने गाजा में इजराइल की सैन्य कार्रवाई की खुलकर आलोचना की है। इसी वजह से इजराइल का कहना है कि ऐसे देशों को गाजा के प्रशासनिक ढांचे में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने भी इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि गाजा को किसी कार्यकारी बोर्ड की नहीं, बल्कि हमास के पूर्ण खात्मे की जरूरत है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति का नया केंद्र बना गाजा

गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ अब केवल एक शांति पहल नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का नया केंद्र बनता जा रहा है। एक ओर इस्लामिक देशों और कई वैश्विक शक्तियों का समर्थन बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर इजराइल की आपत्तियां इस योजना को और जटिल बना रही हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह शांति बोर्ड वास्तव में गाजा के भविष्य को स्थिरता की ओर ले जा पाएगा या फिर अंतरराष्ट्रीय मतभेद इसकी राह में बड़ी चुनौती बनेंगे।