आईएनएस उदयगिरि और हिमगिरि भारतीय नौसेना में शामिल | स्टील्थ फ्रिगेट्स की खूबियां
भारत की समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया जलावतरण
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में मंगलवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। विशाखापट्टनम नौसेना बेस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक साथ दो अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट्स – आईएनएस ‘उदयगिरि’ और आईएनएस ‘हिमगिरि’ – का जलावतरण किया। यह पहली बार है जब अलग-अलग भारतीय शिपयार्डों में निर्मित दो प्रमुख युद्धपोतों को एक ही दिन नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। इस उपलब्धि को भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे आधुनिकीकरण का प्रतीक माना जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत का प्रमाण
ये दोनों युद्धपोत प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए गए हैं, जो भारतीय नौसेना के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का मजबूत उदाहरण हैं। ‘उदयगिरि’ का निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में हुआ, जबकि ‘हिमगिरि’ कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में तैयार किया गया। उल्लेखनीय है कि ‘उदयगिरि’ नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया 100वां जहाज भी है, जो भारतीय तकनीकी कौशल और स्वदेशी डिज़ाइन क्षमता की बड़ी उपलब्धि है।
#WATCH | विशाखापट्नम, आंध्र प्रदेश: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "… गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित INS हिमगिरि और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित INS उदयगिरि दोनों आधुनिक युद्धपोत हैं जिनका निर्माण स्वदेशी तौर पर किया गया है…… pic.twitter.com/GRRWlWH6Oa
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 26, 2025
डिजाइन और तकनीकी श्रेष्ठता
दोनों युद्धपोत अगली पीढ़ी के स्टील्थ फ्रिगेट्स हैं। लगभग 6,700 टन विस्थापन वाले इन जहाजों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इनका रडार क्रॉस सेक्शन कम हो और दुश्मन की नज़र से बचा जा सके। ये जहाज अपने पूर्ववर्ती शिवालिक-श्रेणी के फ्रिगेट्स से बड़े और अधिक उन्नत हैं।
इन युद्धपोतों में डीजल इंजन और गैस टर्बाइनों पर आधारित प्रणोदन प्रणाली लगी है, जो इन्हें 28 नॉट (लगभग 52 किमी/घंटा) की अधिकतम गति प्रदान करती है। इनके संचालन और नियंत्रण के लिए एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है।

आईएनएस ‘हिमगिरि’ की विशेषताएं
- क्लास: प्रोजेक्ट 17ए स्टील्थ फ्रिगेट
- लंबाई: लगभग 149 मीटर
- वजन: 6,670 टन
- गति: 28 नॉट (52 किमी/घंटा)
- रेंज: 5,500 नॉटिकल मील
- चालक दल: 150+ नौसैनिक

सुरक्षा और युद्धक क्षमता:
- स्टील्थ तकनीक से लैस, जो रडार पर आसानी से नज़र नहीं आती।
- अत्याधुनिक रडार और सोनार सिस्टम से सुसज्जित।
- हथियार प्रणाली – ब्रह्मोस जैसी सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, एंटी-सबमरीन टॉरपीडो, रॉकेट लॉन्चर।
- 76 मिमी सुपर रैपिड गन माउंट, क्लोज-इन वेपन सिस्टम।
- दो हेलिकॉप्टर ऑपरेशन की सुविधा।
आईएनएस ‘उदयगिरि’ की विशेषताएं
- क्लास: नीलगिरि क्लास फ्रीगेट, प्रोजेक्ट 17ए
- लंबाई: 149 मीटर
- चौड़ाई: 17.8 मीटर
- वजन: 6,700 टन
- गति: 28 नॉट (52 किमी/घंटा)
- रेंज: 5,500 नॉटिकल मील
- चालक दल: 150–200 नौसैनिक
सुरक्षा और युद्धक क्षमता:
- सतह से हवा और सतह से सतह पर मार करने वाली उन्नत मिसाइलें।
- टॉरपीडो लॉन्च सिस्टम और 76 मिमी ओटो मेलारा गन।
- हेलिकॉप्टर ऑपरेशन के लिए डेक सुविधा।
- नेटवर्क सेंट्रिक युद्ध क्षमता, जिससे यह मल्टी-मिशन भूमिका निभा सके।
- एंटी-सबमरीन, एंटी-एयर, गश्ती और युद्ध अभियानों में सक्षम।

भारत की समुद्री सुरक्षा में बड़ा कदम
इन दोनों जहाजों की शामिली से भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमता और भी सशक्त हो जाएगी। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन और अन्य देशों की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारत का नौसैनिक बेड़ा अब और अधिक आधुनिक और ताकतवर होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक सुरक्षा प्रदाता के रूप में और मजबूती से स्थापित करेगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि, “भारतीय नौसेना की बढ़ती शक्ति आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है। ये जहाज न केवल हमारी सीमाओं की सुरक्षा करेंगे बल्कि भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”
ज्याचे आरमार त्याचा समुद्र…! 🚩
— भाजपा महाराष्ट्र (@BJP4Maharashtra) August 26, 2025
INS उदयगिरी आणि INS हिमगिरी या दोन प्रगत स्वदेशी युद्धनौका भारतीय नौदलात आज सामील होत आहेत. #IndianNavy #Himgiri #Udaygiri #MaritimeMight #AatmaNirbharBhara pic.twitter.com/e8nDJufbok
‘उदयगिरि’ और ‘हिमगिरि’ का नौसेना में एक साथ शामिल होना भारतीय नौसैनिक इतिहास का एक मील का पत्थर है। यह आत्मनिर्भर भारत के संकल्प और रक्षा निर्माण क्षेत्र की क्षमताओं का सशक्त प्रमाण है। आने वाले समय में ये जहाज न केवल भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेंगे बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को भी और सुदृढ़ बनाएंगे।
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