अमेरिका से हथियार सौदा टला, ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ा कदम
भारत में चेतक-चीता हेलिकॉप्टर की जगह 200 नए हल्के हेलिकॉप्टर, अमेरिका से रक्षा सौदा टला
भारत की सैन्य ताकत में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय सेना और वायुसेना अपने दशकों पुराने चेतक और चीता हेलिकॉप्टरों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी में हैं। इनकी जगह आधुनिक तकनीक से लैस करीब 200 नए हल्के हेलिकॉप्टर खरीदे जाएंगे। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन (RFI) जारी किया है, जिससे खरीद प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया जा सके।

120 सेना के लिए, 80 एयरफोर्स को मिलेंगे
इन हेलिकॉप्टरों को रिकॉनेसेन्स एंड सर्विलांस हेलिकॉप्टर (RSH) की श्रेणी में रखा गया है। इनमें से 120 हेलिकॉप्टर भारतीय थल सेना को और 80 हेलिकॉप्टर भारतीय वायुसेना को दिए जाएंगे। ये अत्याधुनिक हेलिकॉप्टर दिन और रात, दोनों समय में मिशन अंजाम देने में सक्षम होंगे।
हेलिकॉप्टरों की मुख्य भूमिकाएँ
नए हेलिकॉप्टर सिर्फ उड़ान भरने तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि युद्ध और आपात स्थितियों में कई अहम भूमिकाएँ निभाएंगे—
- दुश्मन की गतिविधियों पर नज़र रखना और खुफिया जानकारी जुटाना
- सीमित संख्या में सैनिकों को कठिन इलाकों में पहुंचाना
- आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देना
- कठिन मौसम और ऊंचाई वाले इलाकों में ऑपरेशन करना
भारतीय कंपनियों को मौका
RFI के तहत रक्षा मंत्रालय का उद्देश्य तकनीकी जरूरतें तय करना, खरीद प्रक्रिया की रूपरेखा बनाना और संभावित आपूर्तिकर्ताओं की पहचान करना है। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया में भारतीय कंपनियों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि वे विदेशी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) के साथ साझेदारी कर भारत में ही इन हेलिकॉप्टरों का निर्माण कर सकें। यह कदम न केवल ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देगा, बल्कि विदेशी तकनीक के साथ देश में उत्पादन क्षमता को भी मजबूत करेगा।

अमेरिका से डिफेंस डील पर ब्रेक
इस बीच, भारत ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित कई रक्षा सौदों को फिलहाल रोक दिया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन द्वारा भारत पर 50% तक का टैरिफ लगाने के बाद यह भारत की पहली ठोस प्रतिक्रिया मानी जा रही है। भारतीय रक्षा मंत्री का आने वाले हफ्तों में अमेरिका का दौरा तय था, लेकिन अब इसे रद्द कर दिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अमेरिका से P8i निगरानी विमान, स्ट्राइकर कॉम्बैट व्हीकल्स और जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल खरीदने वाला था। लेकिन मौजूदा व्यापारिक तनाव और टैरिफ विवाद के चलते यह सौदा रोक दिया गया है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय केवल अमेरिका को संदेश देने के लिए नहीं है, बल्कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। भारतीय वायुसेना पहले से ही देश में लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, हेलिकॉप्टर, ट्रेनर विमान, मिसाइल, ड्रोन और रडार के स्वदेशी निर्माण पर जोर दे रही है।
रणनीतिक महत्व
पुराने चेतक और चीता हेलिकॉप्टर लंबे समय से भारतीय सेनाओं की रीढ़ रहे हैं, लेकिन अब उनकी तकनीक और क्षमता आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप नहीं मानी जा रही। नए हेलिकॉप्टरों से न सिर्फ सैन्य क्षमताओं में बढ़ोतरी होगी, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में त्वरित कार्रवाई की गति और सटीकता भी बढ़ेगी।
भारत का यह कदम एक साथ कई संदेश देता है—एक ओर यह पुरानी सैन्य तकनीक को आधुनिक बनाने की दिशा में है, तो दूसरी ओर व्यापारिक विवादों के बीच अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को स्पष्ट संकेत भी देता है। साथ ही, यह रक्षा उत्पादन में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नीति को मजबूत करता है, जिससे भविष्य में देश की सुरक्षा जरूरतों के लिए विदेशी निर्भरता घटेगी।
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